मिर्जापुर। अपर जनपद व सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने दुष्कर्म मामले में गवाही देने नहीं आ रहे रिटायर्ट दरोगा और हत्या मामले में बहराइच के एसडीएम के खिलाफ गुरुवार को गैर जमानती वारंट जारी किया है। साथ ही कोर्ट में तय समय से गवाही के लिए पेश न होने पर रिटायर्ड दरोगा का पेंशन रोकने का आदेश दिया है। डीएम देवरियां को पत्र लिखकर एसडीएम को गवाही के लिए पेश करने का आदेश दिया है।
मड़िहान थाना क्षेत्र के डगडगवा गांव में 28 जुलाई 2017 को एक वाहन और 20 हजार रुपये की मांग को लेकर विवाहिता रिंकी की हत्या कर दी गई थी। मामले में विवाहिता के चाचा आशाराम कोल ने थाने में उसके पति समेत अन्य ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले तत्कालीन तहसीलदार रामजीत मौर्या ने विवाहिता के मरने से पूर्व उसका बयान लिया था। राज्य बनाम राहुल कोल आदि का मुकदमा विचाराधीन है। मामले में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि जल्द मुकदमे में फैसला दिया जाए। तत्कालीन तहसीलदार रामजीत मौर्या प्रमोशन पाकर बहराइच के एसडीएम बने तो कोर्ट ने वारंट जारी कर गवाही के लिए तलब किया था पर वे हाजिर नहीं हुए। इस समय वह देवरिया में एसडीएम है। जज जितेंद्र मिश्रा ने डीएम देवरिया को पत्र लिखकर छह फरवरी 2020 को एसडीएम रामजीत मौर्या को गवाही के लिए कोर्ट में उपस्थित कराने के लिए आदेश दिया है। दूसरा मामला चुनार कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में हुए दुष्कर्म मामले में विवेचक दरोगा वीपी मलिक पुत्र प्रीतम सिंह की गवाही का है। तत्कालीन उप निरीक्षक वीपी मलिक सेवानिवृत्त हो गए है। साक्ष्य के अभाव में मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। जज जितेंद्र मिश्रा नेे रिटायर्ड दरोगा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर 10 फरवरी 2020 तक गवाही के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस महानिदेशक लखनऊ का पत्र लिखा है कि गवाही के लिए कोर्ट में उपस्थित न होने तक पेंशन रोक दिया जाए।