भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी पर विंध्य दरबार में मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने को दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती के बाद से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का दौर देर रात तक अनवरत चलता रहा।
घंटा-घड़ियाल, शंख एवं माता के जयकारे से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो रहा था। तरह-तरह के पुष्पों से किया गया मां विंध्यवासिनी का भव्य श्रृंगार दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। मंदिर की छत पर जहां शहनाई के धुन पर मुंडन संस्कार होते रहे, वहीं जगह-जगह बैठ कर साधक जगत जननी की साधना करने में तल्लीन दिखाई दिए। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा करने के लिए आस्थावानों की भीड़ उमड़ी। बाढ़ के चलते रास्तों के खराब होने के कारण लोगों को परेशानी भी हुई लेकिन इससे उनके उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
विंध्याचल मंदिर की आकर्षक फूल-पत्तियों, चुनरी, गुब्बारों व झालरों से सजावट देखते बन रही थी। विंध्यधाम में उमड़ी श्रद्धालुओं के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
भाद्रपद महीन में देवी के मंदिर में दर्शन चलता रहता है। बाढ़ के चलते आस्थावन नहीं पहुंच पाए थे लेकिन अजा एकादशी को हजारों लोग मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे।