जिले में इस बार गेहूं की खरीद बहुत धीमी गति से हो रही है। इसके बाद भी प्रदेश में विंध्याचल मंडल लक्ष्य का 20.17 प्रतिशत खरीद कर प्रथम स्थान पर है। दूसरे स्थान पर 15.23 प्रतिशत खरीद के साथ आजमगढ़ मंडल बताया जा रहा है। मंडल की खरीद 22 प्रतिशत है, जबकि जिले में समर्थन मूल्य योजना के तहत अभी तक 18,953 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है, जोकि लक्ष्य का 25 प्रतिशत है।
आधे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसान गेहूं खरीद केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे थे, लेकिन जब से केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद ने गति पकड़ ली है। इस बार जिले के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 72000 एमटी निर्धारित किया गया है। जिले में गेहूं खरीद के लिए विभिन्न एजेंसियों के 57 केंद्र खोले गए हैं। इसमें खाद्य विभाग के 13, पीसीएफ के 37, पीसीयू के पांच, नेकाफ तथा भारतीय खाद्य निगम के एक-एक केंद्र शामिल हैं। नगर में खाद्य विभाग व एफसीआई के एक-एक केंद्र स्थापित हैं। लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है, लेकिन इसका असर किसानों पर नहीं हो रहा है। व्यापारी अभी भी किसानों के घर-घर जाकर गेहूं की खरीद कर रहे हैं। हालांकि सरकार की घोषणा के बाद व्यापारियों द्वारा की जा रही खरीद में कुछ कमी आई है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी धनंजय सिंह ने बताया कि अब किसान क्रय केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। खरीद ने कुछ गति पकड़ी है। उधर, विंध्याचल मंडल में भी गेहूं खरीद के मामले में मिर्जापुर जिला अव्वल है। जिले में 57 केंद्रों पर मंगलवार तक 18,953 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है, जबकि सोनभद्र में 78 केंद्रों पर 14,542 एमटी तथा भदोही में 38 केंद्रों पर 5,945 एमटी गेहूं की खरीद की गई है। विंध्याचल मंडल में 173 केंद्रों पर अब तक 38,105 एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। संभागीय खाद्य नियंत्रक प्रभाकांत द्विवेदी का कहना है कि मंडल में खरीद की गति कुछ कम जरूर है, लेकिन खरीद की गति बनी हुई है। फिलहाल पूर्वांचल व अवध क्षेत्र में विंध्याचल मंडल प्रथम स्थान पर है।