शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि पर विंध्याचल धाम में भोर में तीन बजे मंगला आरती के बाद से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। माता का कपाट खुलने से पूर्व ही विंध्य की गलियों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई थीं। विंध्यधाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धाभाव से शीश नवा कर मंगलकामना की।
विंध्य की गलियों में कतार में खड़े भक्त डलिया में माला-फूल, नारियल-चुनरी, रोरी-रक्षा सहित प्रसाद लिए मां के दर्शन को लालायित दिखाई दिए। दोपहर में मां की मध्याह्न आरती समय कपाट बंद होते ही कतार में जो श्रद्घालु जहां खड़े थे, वहीं बैठ कर कपाट खुलने का इंतजार करते रहे। कपाट खुलने के बाद मंदिर पहुंच कर किसी ने गर्भगृह में जाकर तो किसी ने मां विंध्यवासिनी का झांकी से दर्शन कर सुख-समृद्घि की कामना की। मंदिर की छत पर मुंडन व जनेऊ संस्कार कराने के लिए लोगों का तांता लगा रहा, वहीं विंध्याचल मंदिर परिसर सहित अष्टभुजा पहाड़ पर जगह-जगह बैठकर साधक वैदिक मंत्रोच्चारण बीच साधना करते हुए दिखे। मां का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान मां काली, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, मां शीतला, बटुक भैरव, श्री पंचमुखी महादेव, दक्षिणमुखी हनुमान जी के मंदिर में देवी-देवताओं के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन किया। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं मां के जयकारे से मंदिर सहित विंध्य की गलियां गुंजायमान हो रही थीं। नवरात्र के दिनों में विंध्यधाम की तरह-तरह के पुष्पों व झालरों से की गई सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही है। देवीधाम में पुलिस व पीएसी के जवान मुस्तैदी से डटे रहे, वहीं स्काउट-गाइड के छात्र-छात्राएं व श्री विंध्य पंडा समाज के लोग भी भक्तों की सेवा में लगे रहे।