नवरात्र में विंध्य त्रिकोण पथ पर पत्थरों से रोजाना हजारों घरौंदे बनाए जाते हैं। लोक मान्यता है कि अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा के दौरान घरौंदा बनाने से अपना घर बनाने की लालसा देवी पूरी करती हैं। उसके घर पर हमेशा मां का आशीर्वाद बना रहता है। इसी के चलते कालीखोह से अष्टभुजा मंदिर तक सड़क के दोनों तरफ पत्थरों के घरौंदे बनाए जाते हैं।
नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद हजारों आस्थावान रोजाना त्रिकोण परिक्रमा करते हैं। यात्रा के दौरान वे पत्थरों के टुकड़ों को सजाकर सपनों के घर का प्रतिरूप बनाते हैं। तीनों देवियों के दर्शन पूजन के बाद भक्त अष्टभुजा पहाड़ पर पहुंच कर वहां पहले से पड़े पत्थरों से घरौंदे बना कर मां से अपना आवास बनाने की मनौती मांग रहे हैं। बड़ो की देखादेखी बच्चे भी घरौंदे बनाते हुए देखे जा सकते हैं। शास्त्रों में इस परंपरा का कहीं जिक्र नहीं है लेकिन इस लोक मान्यता पर दूरदराज से आने वाले आस्थावान भी घरौंदा बनाना नहीं भूलते।
इलाहाबाद से दर्शन पूजन करने आए गौरव दूबे ने बुधवार को जब सबको पहाड़ पर पत्थर से घरौंदा बनाते देखा तो वे इस मान्यता के बारे में जिज्ञासा से भर उठे। उनके पूरे परिवार ने मिलकर घरौंदा बनाया। जौनपुर की संगीता चौहान, भभुआ के शिवचरन और मालती देवी ने भी पहाड़ पर पत्थरों से घरौंदा बनाया। उनका कहना था कि लोगों ने बताया उन्होंने इस मान्यता को आजमाया है, इसका असर होता है।