वासंतिक नवरात्र के पहले दिन विंध्य दरबार में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और करीब ढाई लाख श्रद्धालुओं ने अपने शीश नवाए। मंगला आरती से दर्शन-पूजन का शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
मां विंध्यवासिनी का फूलाें से हुए शृंगार के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख और माता के जयकारे से धाम परिसर गूंजता रहा।
महालक्ष्मी का स्वरूप मानी जाने वाली मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुआें का जमावड़ा विंध्य क्षेत्र में शुरू हो गया। बोल सांचे दरबार की जय... या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:, विंध्याचल माई की जय... के जयकारे से पूरा विंध्य क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।
देर रात तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी रहा। मंदिर आने वाली सातों गलियों के साथ मुख्य मार्ग गुलजार रहे। हाथ में नारियल, चुनरी, फूल, गजरा, प्रसाद की टोकरी लिए भक्त देवी के जयकारे लगाते बढ़े जा रहे थे।
श्रद्धालुआें ने मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप के दर्शन किए। न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी रोड, मंदिर की तरफ जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।
पंडा समाज के अध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय के अनुसार पहले दिन ढाई लाख श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाए।