तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरे लखनिया दरी का दृश्य बरसात में काफी मनोरम हो जाता है। पहाड़ों पर पेड़ों की हरियाली, जल-प्रपात और कल-कल कर गिरते झरने लोगों को आकर्षित करते हैं।
अहरौरा नगर से आठ किलोमीटर दक्षिण स्थित लखनिया दरी जलप्रपात स्थल के विकास की असीम संभावनाएं हैं लेकिन इस दिशा में कुछ खास नहीं किया गया। 2012 में सपा के शासन में पर्यटन मंत्री रहे ओमप्रकाश सिंह लखनिया दरी आए थे। उन्होंने लखनिया दरी से चूनादरी जल-प्रपात तक रोप-वे बनवाने की घोषणा की थी लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं किया गया। यहां दूर दराज से लोग पिकनिक मनाने आते हैं।
सरकार की उदासीनता के कारण उनके बैठने के लिए चबूतरे, बारिश से बचाव के लिए शेड, कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम नहीं होने से सैलानी खुद को असहज महसूस करते हैं।
सन 1827 में ब्रिटिश हुकूमत के समय अहरौरा जलाशय में तीन तखवा पुल बनाया गया था जिससे होकर लोग सोनभद्र जाते थे। उस दौरान लखनिया दरी जल-प्रपात जाने के लिए कोई मार्ग नहीं था।
लोग जंगल एवं पहाड़ों से होकर होकर जाते थे। प्रथम पंचवर्षीय योजना में 1951 से 56 के मध्य वाराणसी से सोनभद्र जाने के लिए सड़क का निर्माण कराया गया था। इसके बाद जल-प्रपात पर आने जाने का रास्ता सुगम हुआ। इस बारे में डीएफओ राजेश चौधरी बताते हैं कि लखनिया दरी के विकास की योजना पर काम हो रहा है। इसको लेकर शासन गंभीर है। जल्द ही कुछ नए कार्य किए जाएंगे।