अहरौरा। कोरोना महामारी का असर पर्यटन स्थलों की रौनक पर भी भारी पड़ने लगा है। बारिश के बीच सुहाना मौसम सहोने के बाद भी लोग सैर- सपाटा के लिए घर से बाहर निकलने से गुरेज कर रहे है। इसके चलते क्षेत्र की वादियों मे बसे अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य से सुशोभित पर्यटन स्थलो मे लिखनिया दरी और चूनादरी में सन्नाटा पसर गया है। कोविड- 19 का खौफ हो या सुरक्षा के प्रति सैलानियों की संजीदगी कहना कठिन है। परंतु यह सच है कि पर्यटकों के बिना प्रकृति की मनोरम सौगात सूनी पड़ी हुई है। बारिश के मौसम में लिखनिया दरी जलप्रपात पर भारी भीड़ उमड़ती है। क्षेत्र के लिखनिया दरी, भल दरिया, चुना दरी जल प्रपात पर बारिश का मौसम शुरू होते ही पूर्वांचल के साथ ही कई प्रांतों से सैलानियों की भीड़ उमड़ती रहती है। पहाड़ियों के बीच गिरते हुए झरनों के मनोरम दृश्य का लुत्फ उठाने के लिए दूर दराज से रोजाना हजारों की संख्या में सैलानी सैर सपाटा करने के लिए यहां पहुंचते रहे है। दो दिनों से हो रही बारिश के बीच विहंगम पर्यटन स्थल लखनिया दरी और चूना दरी का अलौकिक सौन्दर्य सुहाना हो गया है। लखनिया दरी और चूना दरी जल प्रपात पर एक बार जो सैलानी आता है वह यहां का मुरीद हो जाता है। कोविड- 19 संक्रमण के बीच इस विहंगम जल प्रपात पर ऊंचाई से गिरते हुए झरनों की गूंज को सुनने और मदमस्त आनंद की मोहकता को समेटने के लिए सैलानियों की भीड़ नहीं आ पा रही है, जिससे यहां पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
औषधिय जड़ी-बूटी और लताएं भी हैं बहुमूल्य
अहरौरा । प्रकृति के सुरम्य वातावरण में बहूमूल्य वन औषधियों और लताओं की भी बहुलता है।इस पर्वतीय क्षेत्र मे तपस्वियों ऋषि मुनियों ने तप साधना और योग से सिद्धी भी हासिल की है। असाध्य रोगों का प्रचुर इलाज आयुर्वेद के इन वन औषधियों मे मौजूद है। जिनकी गुणवत्ता लाजवाब है।
-सैलानियो के यहां आने पर प्रतिबंध का आदेश मुख्यालय से जारी होता है। जिसके परिप्रेक्ष्य मे अभी कोई आदेश नहीं है। लॉकडाउन के दौरान पुलिस के स्तर से मास्क लगाकर सोशल डिस्टेन्सिग का पालन हर हाल में कराया जाएगा।
-हितेन्द्र कृष्ण क्षेत्राधिकारी आपरेशन।