फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mirzapur News: कांटे की टक्कर में कम हो गया केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया की जीत का अंतर

विज्ञापन
विज्ञापन
मिर्जापुर। अपना दल एस की प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को भले ही तीसरी बार जीतकर हैट्रिक लगाई हो, लेकिन जीत का अंतर कम होने से उनके समर्थकों के चेहरे लटके रहे।
विज्ञापन

अनुप्रिया इससे पहले भी दो बार सांसद रह चुकी हैं। दोनों ही बार उन्होंने दो लाख वोट से ज्यादा के अंतर से विजय हासिल की थी। इस बार यह अंतर काफी कम हो गया। इसका सीधा कारण भदोही के सांसद रमेश बिंद का सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना रहा। रमेश बिंद ने 13 मई को नामांकन किया और उसके बाद चुनाव प्रचार किया। इतने कम समय में ही उन्होंने कांटे की टक्कर दी। इसकी पूरे जिले में चर्चा रही। शुरूआत में तो यही लग रहा था कि रमेश बिंद ही चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन अंतत: अनुप्रिया पटेल ने उनको हरा दिया। पहले यह चुनाव एकतरफा हो रहा था। माना जा रहा था कि किसी के पास कोई विकल्प नहीं है, लेकिन रमेश बिंद ने अपने पुराने तेवर दिखाते हुए जबरदस्त टक्कर दी। रमेश के आने से ओबीसी एवं एससी-एसटी के मतों में बिखराव हो गया। इसके बाद राजा भैया के मामले में क्षत्रिय मतदाताओं ने भी नाराजगी जताई। सवर्ण मतदाताओं में से ब्राह्मण समाज के मत पहले से ही बसपा के मनीष त्रिपाठी के नाम पर गोलबंद बताए जा रहे था। इसके बाद अनुप्रिया पटेल को पटेल समाज के मतों का ही भरोसा रहा। शायद यही वजह रही कि सपा को भी पर्याप्त समर्थन मिला और बसपा को भी मतदाताओं ने बड़ी संख्या मेंं अपना समर्थन दिया।मतगणना के दौरान लोग अंतिम चक्र तक सांसें रोके रहे। हालांकि 15वें चक्र के बाद से अनुप्रिया ने बढ़त बनाई। इसमें कई बार उतार-चढ़ावहोता रहा और मतों का अंतर 50 हजार तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में यह अंतर 40000 से नीचे तक पहुंच गया। नगर क्षेत्र में अनुप्रिया पटेल को मतदाताओं का साथ मिला, लेकिन रमेश बिंद को भी नगर के मतदाताओं का साथ मिला। मझवां से बसपा के टिकट पर तीन बार विधायक रहे रमेश बिंद ने अपने अनुभव का पूरा लाभ उठाया और सामान्य सी दिखने वाली टक्कर को कांटे की टक्कर में बदल दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें