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Mirzapur News: आज सजेगी कजरी की शाम, ख्यातिलब्ध कलाकार देंगे प्रस्तुति

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कजरी वाली खबर का लोगो
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मिर्जापुर। जिले की लोकगायन विधा कजरी को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की ओर से मां तुझे प्रणाम के तहत दो सितंबर को कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम लालडिग्गी स्थित मिलन पैलेस में शाम छह बजे से आयोजित है।
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कजरी महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर के कलाकार प्रस्तुति देंगे। कजरी का स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ा योगदान रहा है। कजरी महोत्सव के जरिए स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वालों का भी स्मरण होगा। मुख्य रूप से पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, मुंबई के लोक कलाकार सुरेश शुक्ला, अंतरराष्ट्रीय कलाकार ऊषा गुप्ता, वाराणसी की लोक गायिका शैलबाला मिश्रा व अन्य कलाकार शामिल होंगे।



कार्यक्रम के सहयोगियों में ज्ञानंदा लॉ कॉलेज अमरावती, अन्नपूर्णा प्रसादम रेस्टोरेंट, लायंस स्कूल मिर्जापुर, मां बलराजी सेवा संस्थान दूधनाथ चुंगी, कमला मेमोरियल स्कूल धौरूपुर, दीपक कुमार सर्राफ धुंधी कटरा, द यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन मिर्जापुर, क्षितिज हुंडई, मशीन बोल्ट इंटरप्राइजेज भरुहना, न्यू मानस ट्रेडर्स बैरहवा चौराहा जंगी रोड, सेंट जेवियर्स स्कूल मिर्जापुर, देलही पब्लिक सेकेंडरी स्कूल भरुहना, सत्यम इंटरप्राइजेज पीलीकोठी, एसएन पब्लिक स्कूल एंड हास्टल, ब्रजदेव डेवलपर्स, लार्ड बुद्धा इंटरनेशनल स्कूल मुंहकुचवां, इंटरलक्स इंटीरियर्स, जिला उद्यान अधिकारी मिर्जापुर, संभागीय परिवहन अधिकारी मिर्जापुर शामिल हैं।
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सावन व भादो माह को कजरारी रात हो, काले घने बादल उमड़-घुमड़ कर गरज रहे हो, रिमझिम बूंदें पड़ रही हों, सनसन करती रात, इसी समय धरती हरितिमा के परिवेश में मदमस्त हो उठती है। कोयल की कुक, पपीते की पुकार, झींगुर की झंकार और दामिनी से प्रकृति को उन हरी भरी वादियों से जो गीत मुखरित होता है, उस गीत का सलोना सा नाम है कजरी।
- पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, कजरी गायिका

कजरी उत्तर भारत की समृद्ध लोक गायन विधा है। यह मिर्जापुर से निकल कर जहां भी उत्तर भारतीय समाज बसा है, वहां बढ़-चढ़कर कजरी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कजरी गायकी में पारिवारिक, संयोग-वियोग व सामयिक प्रसंग प्रधान रहते हैं।
सुरेश शुक्ला, अभिनेता व लोक कलाकार


कजरी उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक गायिकी है। कजरी पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध लोकगीत है। कजरी की उत्पति मिर्जापुर कीमानी जाती है। कजरी लोक संगीत की महत्वपूर्ण विधा है। कजरी खेत खलिहान से लेकर राजघराने तक में विख्यात रही है।
- उषा गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार

कजरी वर्षा ऋतु के आवाह्न का गीत है। मां विंध्यवासिनी देवी का एक नाम कज्जला देवी है। कजरी लोक संस्कृति संवाहक है। जिसमें मुख्य रूप से मिर्जापुर और बनारस की कजरी सरनाम है। कजरी सावन व भादों के महीने में लोक संगीत का रूप धारण कर लेती है। -
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- शैलबाला मिश्र, अभिनेत्री व लोक कलाकार
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