पहाड़ी ब्लॉक के शिष्टा कला महुवारी के खेत में छिपे बाघ पर सारी रात पहरा रहा। सुबह कानपुर की टीम अरहर के खेतों को खंगालती रही लेकिन उन्हें बाघ नहीं मिला। उसके आसपास के गांवों में चले जाने के अंदेशे के कारण आसपास के गांवों में भी उसकी तलाश हुई। बाघ तो नहीं मिला पर उसके पदचिह्न जरूर मिले हैं। बाघ के नहीं पकडे़ जाने से ग्रामीणों में दहशत है।
शुक्रवार को शिष्टा कला महुवारी के अरहर के खेत में बाघ देखा गया था। भगाने पहुंचे ग्रामीणों पर उसने हमला बोल दिया था, जिसमें सेवालाल घायल हो गए थे। डीएफओ केके पांडेय की सूचना पर शनिवार को सुबह कानपुर चिड़ियाघर के प्रभारी डा. आरके सिंह के साथ दीपक कुमार व विनोद कुमार पहुंचे। मड़िहान रेंजर आरसी पाठक व विंढमफाल रेंजर आरसी यादव, डेढ़ सेक्सन पीएसी तथा ग्रामीणों के साथ टीम के सदस्य बाघ पकड़ने निकले। टीम ने अरहर के खेत खंगाल डाला लेकिन बाघ नहीं मिला।
टीम का कहना था क बाघ रात में जंगल की ओर भाग गया होगा। उसके बाद आसपास के गांव जददूपुर सहित तमाम गांवों में घूमती रही। दो किलोमीटर दूर बसहा गांव के घनश्याम पटेल व हरिओम पटेल के खेत में बाघ के पैरो के निशान देखकर उस इलाके में काफी देर तक वहां खोजबीन की जाती रही। बैरहवां में नहर के किनारे उसके पैरों के निशान देखने के बाद टीम ने माना कि वह मड़िहान के जंगल से होते हुए पहाड़ पर चला गया है।
बाघ के पकड़े नहीं जाने पर गांव वालों ने दहशत है। इन दिनों चना व मटर की कटाई चल रही है। लेकिन किसान बाघ से काफी डरे हुए हैं और खेत में नहीं जा रहे है।
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक प्रधानाचार्य उमाकांत पाठक व साकेत बिहारी पांडेय का कहना है कि 20 मार्च से परीक्षा होने वाली है लेकिन डर के मारे अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे।