मिर्जापुर। जिले में 10 अगस्त से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान शुरू होगा। अभियान के दौरान 1850 टीमें घर-घर जाकर 23 लाख से ज्यादा लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाएंगी। दवा वजन और लंबाई हिसाब से दी जाएगी। दो साल से ज्यादा उम्र के ऊपर के लोगाें को दवा खिलाई जानी है।
यह जानकारी सीएमओ कार्यालय के सभागार में आयोजित कार्यशाला में सीएमओ डॉ.सीएल वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि गर्भवती व गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। बीपी और शुगर के मरीज दवा खा सकते हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. संजय द्विवेदी ने बताया कि तीन प्रकार की दवाओं का सेवन कराया जाता है। इसमें एक डीईसी की गोली है, जिसे खाली पेट नहीं खाना है। दूसरी एल्बेंडाजोल की गोली है जिसे चबाकर खाना है। तीसरी आइवरमेक्टिन की गोली भी खानी है। आइवरमेक्टिन की गोली खाने से स्नोफीलिया में भी राहत मिलती है। उन्होंने बताया कि नगर क्षेत्र और जिले के 12 ब्लाॅकों में से नौ में अभियान चलाया जाएगा। पटेहरा, लालगंज और मझवां ब्लाॅक फाइलेरिया मुक्त हो गए हैं। इन ब्लॉकों में सिर्फ एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। अभियान के बाद भी सभी ब्लॉकों में जांच की जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिले में फाइलेरिया के 826 एक्टिव केस हैं। मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटकर खुद संक्रमित हो जाता है। वही मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर उसे भी संक्रमित कर देता है। एसीएमओ डाॅ. मुकेश कुमार ने बताया कि जिले में 23 लाख 13 हजार 49 लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य है। इसके लिए 1850 टीमें गठित की गई हैं। एक टीम में दो लोग शामिल हैं। इस बार टीम में आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ एक पुरुष सदस्य शामिल रहेगा। एक टीम को 1250 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य दिया गया है। निगरानी के लिए 370 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। ब्लाॅक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है।