हरितालिका तीज पर सौभाग्यवती महिलाआें ने निर्जला व्रत रखकर पति के दीर्घायु की कामना की। महिलाआें ने हरितालिका तीज व्रत का कथा सुना। व्रती महिलाआें ने शिव-पार्वती एवं भगवान गणेश जी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर मंगलकामना की। पूजन को लेकर महिलाओं में सुबह से ही गजब का उत्साह दिख रहा था।
सौभाग्य कामना को लेकर व्रती महिलाआें एवं कुंआरी कन्याएं भगवान शिव का निर्जला व्रत रखकर विधिवत पूजन-अर्चन किया। हरितालिका तीज पर्व पर व्रती महिलाआें ने नदी किनारे, घराें में तथा शिवालयों में एकत्रित होकर ब्राम्हणाें द्वारा कथा सुना। पर्व के दिन व्रती महिलाआें ने बड़े ही श्रद्धाभाव से कच्ची मिट्टी से बनी शिव-पार्वती व भगवान गणेश की मूर्ति का पूजन कर घर में सुख-समृद्धि के लिए कामना की।
महिलाआें ने माता पार्वती को बांस की डलिया में रखे सुहाग के सामानाें को चढ़ाया वहीं भगवान शंकर को बेलपत्र आदि तथा गणेश भगवान को लड्डू व पेड़ा चढ़ाकर विधिवत पूजन-अर्चन कर अखंड सौभाग्यवती का वरदान मांगा। महिलाएं ब्राम्हणों द्वारा हरितालिका तीज व्रत की कथा को सुनने व पूजन के उपरांत घर में बने गुझिया, मिठाई, पपड़ी वगैरह बांस के बर्तन में रखकर दान दिया। उत्तम पति की कामना को लेकर कुंआरी कन्याआें ने भी हरितालिका तीज व्रत रखा और कथा सुनने के बाद विधिवत पूजन-अर्चन किया।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया कि लिंगपुराण के अनुसार तीज के दिन सौभाग्य कामना को लेकर व्रती महिलाआें एवं कुंआरी कन्याएं भगवान शिव का निर्जला व्रत रखकर विधिवत पूजन-अर्चन करतीं हैं। बताया कि जो स्त्रियाें विधि-विधिवत व्रत व पूजन करतीं है, वह माता पार्वती की भांति उनका सुख और सौभाग्य अमर रहता है। रविवार की प्रात:काल से सोमवार को प्रात:काल ब्रम्ह मुहूर्त में व्रत का समापन होगा और महिलाएं पारण करेंगी।