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फुंफकार रहे विषधर- डसने पर झाड़फुंक से बचे, अस्पताल जाएं

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बरसात के दिनों में क्षेत्र में सर्पदंश के शिकार लोगों की संख्या काफी बढ़ गई है। अंधविश्वास और झाड़फूंक कराने और समय से इलाज न होने के कारण सर्पदंश से पीड़ित लोगों की मौत हो रही है। खेत-खलिहान में बारिश का पानी भर जाने से सांप गांवों के तरफ रुख कर दिए हैं। वह खपरैल घास-फूस के मकान, लकड़ी के ढेर सहित अन्य सुरक्षित स्थानों पर बैठ जाते हैं, इन्हीं जगहों पर सर्प के डसने की घटना अधिक होती है।
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पिछले एक सप्ताह से हो रही बारिश के बाद सीएचसी-पीएचसी के साथ मंडलीय अस्पताल में सर्पदंश के कई मामले आ चुके है। इसमें कई तो झाड़-फूंक के बाद जवाब मिल जाने के बाद अस्पताल पहुंचे हैं। जहां डाक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग सर्प दंश के शिकार होते हैं। पिछले दो दिनों में सर्पदंश और विषैले जंतु के काटने से पांच लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसमें अधिकांश सर्पदंश के बाद अस्पताल न जाकर झाड़फूंक कराने वालों के पास पहुंच गए। झाड़फूंक करने वाले द्वारा दवा आदि पिलाने के बाद राहत न मिलने पर लोग अंत में अस्पताल पहुंचते है। इस कारण लोगों की जान जा रही है। सर्पदंश की घटना होने के बाद सबसे पहले अस्पताल जाना चाहिए। जहां पर एंटी स्नैक वेनम लगने पर जान बचाई जा सकती है। फिलहाल मंडलीय अस्पताल और जिले के सीएचसी/पीएचसी में पर्याप्त मात्रा में एएसवी उपलब्ध है। हलिया, पीएचसी प्रभारी डा. अभिषेक जायसवाल ने बताया कि 32 बायल एएसवी उपलब्ध है। झाड़फूंक के चक्कर में लोग जान गवांते हैं। उनको अस्पताल आना चाहिए। पड़री, पीएचसी प्रभारी डा. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि 10 एंटी स्नैक वेनम बायल मौजूद है। जिगना, पीएचसी सरोई प्रभारी डा. वीके भारती ने बताया कि 10 बायल एएसवी उपलब्ध है। एक माह में छह की मौत हुई है।
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