मिर्जापुर। जिले के राजगढ़ व सीखड़ विकास खंड के टमाटरों का स्वाद बेहतरीन है। पहले तो इस सूची में राजगढ़ के पास का क्षेत्र कर्मा भी शामिल था लेकिन अब यह जगह सोनभद्र में आती है। यहां का टमाटर प्रदेश की प्राय: सभी नामी-गिरामी सब्जी मंडियों के अलावा विदेशों में भी जाता था, लेकिन इस समय निर्यात बंद है।
जिले में टमाटर का रकबा लगभग सात हजार एकड़ है। टमाटर के लिए पहले खेत की तैयारी की जाती है। मई- जून में खेत का प्लाऊ किया जाता है। इसके बाद उसमें किसान गोबर व कम्पोस्ट खाद डालना शुरू कर देते हैं। इस खाद को मिट्टी में मिलाने के लिए एक- दो बार खेत की जोताई कराई जाती है। इसके बाद टमाटर की नर्सरी पंद्रह से बीस जुलाई के बीच डाली जाती है। एक बीघा टमाटर की खेती करने के लिए पांच ग्राम बीज की जरूरत पड़ती है। इस दौरान बरसात का मौसम होने के कारण नर्सरी बचाने के लिए प्रबंध करना पड़ता है। नर्सरी के ऊपर किसान चारो किनारे लकड़ी खड़ा कर बरसाती या प्लास्टिक की पन्नी लगा देते हैं, जिससे बरसात का पानी सीधे नर्सरी पर न पड़े। बरसात का सीधे पानी पड़ने पर नर्सरी गलकर खराब हो जाती है।यह नर्सरी बीस से पचीस दिन में तैयार हो जाती है। इसके बाद खेत में रोपाई शुरू होती है। टमाटर के खेत का चयन करते समय इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वह ढालू भूमि हो ताकि बरसात का पूरा पानी निकल जाए। टमाटर के एक से दूसरे पौधे व लाइन की दूरी तीन से चार फीट होती है। यह दूरी रखने से पौधों के बढ़ने फैलने व मिट्टी चढ़ाने में सुविधा होती है।