विंध्याचल। राष्ट्रपति रामनाथ कोविद का विंध्याचल से गहरा नाता जुड़ा हुआ है। राष्ट्रपति विंध्याचल की प्रत्येक गलियों की अच्छी जानकारी रखते हैं। इतना ही नहीं वे विंध्याचल के नामचीन चेहरों को को भी भलिभांति जानते व पहंचानते हैं।
राष्ट्रपति का ताज मिलने से पहले वे आरएसएस के पदाधिकारी भी रहे। विंध्याचल में तकरीबन 15 वर्षों तक उनका जीवन गुजरा। उनका सबसे पसंदीदा निवास मां विंध्यवासिनी मंदिर के ठीक बगल में स्थित खत्री धर्मशाला रहा। विंध्याचल आने पर वे यही पर ठहरते रहे। एक बरामदे में बैठकर वे पूजा-पाठ के साथ ही मां विंध्यवासिनी की साधना करते थे। राष्ट्रपति पूड़ी-सब्जी, जलेबी व दही के शौकीन भी थे।
फतेहपुरी मिष्ठान के संचालक लोकतंत्र सेनानी रहे स्वर्गीय विंध्यवासिनी प्रसाद से उनका गहरा नाता रहा है। जब-जब विंध्याचल में उनका आगमन हुआ करता था तो विंध्याचल के निवासी दीपू पाठक के द्वारा उनको मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के साथ ही उनके दिनचर्या की जो भी जरूरत होती थी वह पूरा करते रहे। लेकिन विगत वर्ष पूर्व दीपू पाठक कैंसर से पीड़ित होकर स्वर्गवासी हो गए।