आचार्य रामचंद्र शुक्ल की रचनाओं ने समाज को एक नई दिशा दी। उन्होंने ने हिंदी साहित्य को विकास की ओर अग्रसर किया, जिसका परिणाम है कि हिंदी साहित्य जगत पूरे विश्व में आचार्य शुक्ल की अलख जगा रही है।
उक्त बातें नगर मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार मिश्र ने भरुहना तिराहा में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य में आचार्य शुक्ल ने अद्वितीय योगदान दिया। विशिष्ट अतिथि बृजदेव पांडेय ने कहा कि आचार्य शुक्ल हिंदी साहित्य का इतिहास लिखकर हिंदी साहित्य के स्वरूप को दर्शाया, जो आज भी प्रासंगिक है।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष माता प्रसाद दूबे ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रचनाओं के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। अमिताभ पांडेय ने कहा कि आचार्य शुक्ल ने अपनी रचनाओं से अमिट छाप छोड़ा है। कार्यक्रम में सलिल पांडेय, अनुज प्रताप सिंह, इरफान कुरैशी ने विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य शुक्ल के पौत्र राकेश चंद्र शुक्ल ने किया। कार्यक्रम में आशीष चंद्र शुक्ल, शोभनाथ भारती, इंद्र बहादुर यादव, रामनरेश मिश्र, खालिक, तीर्थराज मिश्र, कमलेश मौर्य, सुरेश कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।