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देवी के सौम्य स्वरूप की पूजा का माहात्म्य

Sun, 24 Sep 2017 12:36 AM IST
mirzapur news
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संत मोरारी बापू ।
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 संत मोरारी बापू ने विंध्य धाम में प्रवचन के तीसरे दिन  देवी के प्रताप और दस विद्याओं की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला। कहा कि तीर्थ स्थलों से बलि प्रथा समाप्त होनी चाहिए यही सबसे बड़ी स्वच्छता होगी। मां का स्थाई स्वरूप सौम्य है। वह उग्र समय आने पर होती हैं। ऐसे में मां के सौम्य रूप की ही पूजा की जानी चाहिए।  
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उन्होंने कहा कि देवी प्रकाश तत्व है। दीप्त बन कर ब्रहम और जीव के बीच विद्यमान हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे राम ब्रह्म हैं, लक्ष्मण जीव है और बीच में माया रूपी सीता प्रकाश स्वरूप हैं। दस विद्या का की उत्पत्ति का वर्णन करते हुए कहा कि मां का सौम्य रूप पार्वती, गौरी, शारदा, लक्ष्मी और भवानी है। उग्र रूप महाकाली, भैरवी, कुष्मांडा और बंगलामुखी है। श्रीराम मां तारा के प्राकट्य रूप हैं जबकि श्रीकृष्ण मां काली से प्रकट हुए। राम ने सबके सुख के लिए अवतार लिया।
बापू ने कहा कि नवदुर्गा की स्तुति सिद्धि के लिए नहीं बल्कि आत्मशुद्धि के लिए करना चाहिए। मैं आज मां की अनुकंपा इस तीनों महादेवियों के सानिध्य में कथा वाचन कर रहा हूं। यंत्र, तंत्र, मंत्र इसका अर्थ तीनों सिद्धियां हैं आपका जो मन करे उसे उस ओर ले जा सकते हैं। यंत्र सदैव अपवाद होता है। तंत्र साधना तामसी है। मंत्र साधना कभी-कभी तामसी होती है तो कभी राजसी  होती है। राम की साधना केवल और केवल गुणी होती है। कृष्ण एवं शिव बहुत बड़े साधक हैं जो अपने स्वभाव से जीते हैं। उन्हें भी कोई प्रभावित नहीं कर सकता।
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तेरी प्यारी प्यारी सूरत...  
विन्ध्याचल। कथा के दौरा जब लोग भक्तिरस में सराबोर में होकर झूमने लगे तो बापू ने भी हंसते हुए एक ग़जल प्रस्तुति कर दी ।तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नजर न लगे। देखा ना करो तुम आईना कोई खुद की नजर ना लगे। इससे पंडाल में उपस्थित श्रोता भक्तों के चेहरे पर खुशी की उमड़ पड़ी। उन्होंने श्री राम के भक्ति को गजल के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा, हम तुम्हें क्या सुनाएं, साये में आंसुओं की कोई कैसे मुस्कुराये, नजदीक आते आते हम दूर हो गए, इन वादियों से कह दो कि हमको ना भूल जाएं।  

 बिजली पर खत्म करनी पड़ी कथा  
विंध्याचल। कथा के दौरान पौने एक बजे बिजली गुल हो गई। कुछ देर तक माइक से आवाज आती रही फिर वह भी बंद हो गई। लगभग 15 मिनट तक बापू ने इंतजार किया और फिर खिन्न मन से बिना माइक के ही हरे कृष्ण हरे राम का मंत्र जाप कर कथा को समाप्त कर दिया। इसी बीच बापू को पता चला कि पंडाल में प्रसाद ग्रहण करने वालों की संख्या कम है तो उन्होंने मेन्यू बताते हुए कहा कि नौ दिन चूल्हे बंद कर दो, प्रसाद जरूर ग्रहण करो।
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