गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी का दौर जारी है। धीरे धीरे गंगा खतरे के निशान को पार करने के करीब पहुंच रही है। शुक्रवार की शाम तक गंगा का जलस्तर 77.250 मीटर था जो खतरे के निशान 77.724 से लगभग आधा मीटर कम है। एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही गंगा कब खतरे के निशान को पार कर जाएगी इस बात से लोग चिंतित हैं। डीएम राजेश सिंह व पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया और कर्मचारियों से सतर्क रहने को कहा।
श्ुाक्रवार की दोपहर तीन बजे गंगा में जलस्तर 77.230 मीटर था जो शाम को 20 सेमी बढ़ गया। बारिश कम होने व बांध से पानी देर से छोड़े जाने के कारण शुक्रवार को इलाहाबाद में दो सेंटीमीटर, भदोही के सीतामढ़ी में एक सेंटीमीटर तथा मिर्जापुर में एक सेंटीमीटर की रफ्तार से गंगा बढ़ रही थी। छानबे, कोन, सीखड़, पहाड़ी व नरायनपुर ब्लॉक के सैकड़ों गांवाें में पानी घुस गया है।
वर्ष 1978 में 77.724 खतरे के निशान से लगभग ढाई मीटर 80.34 के ऊपर गंगा बह रही थी। जिससे कोन, सीखड़, मझवा,ं छानबे समेत अन्य ब्लाकों के सैकड़ों गांव पूरी तरह से डूब गए थे। वर्ष 2014 के दौरान एक बार गंगा ने रौद्र रूप धारण किया। धीरे धीरे बढ़ रहा पानी 77.450 सेंटीमीटर तक पहुंचने पर छानबे, कोन, पहाड़ी, सीखड़, नरायनपुर जमालपुर समेत में बाढ़ आ गई थी। हरसिंगपुर में पानी भरने से उसका दूसरे गांव से संपर्क टूट गया था।
बसारतपुर के मझवां तरास, चुरामनपुर, अदलपुरा, मेड़ियां, खानपुर, मंगरहां, रामगढ़, सीखड़, घमही, छितकपुर, हांसीपुर, खैरा, टकटकपुर, पिपराहीं, पसियाहीं, विदापुर आदि गांवों में गंगा का पानी पहुंच गया, जिससे ग्रामीण व किसान नये ठौर-ठिकाने की तलाश में जुट गए हैं। करीब दो हजार की आबादी वाला पिपराहीं गांव चारों तरफ गंगा के पानी से घिर गया है, लेकिन अभी तक गांव में नाव की व्यवस्था नहीं हो पाई है, ग्रामीण छतों पर बैठ कर पानी का घटने का इंतजार कर रहे हैं। हांसीपुर, छितकपुर, प्रेमापुर, फूलहां गांवों में घुटने भर पानी लगा है।