जिले में स्वच्छंद विचरण करने वाले छुट्टा पशु लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। नगर में छुट्टा पशुओं के कारण अक्सर यातायात जाम की समस्या पैदा हो रही है। हादसों में लोग घायल हो रहे हैं। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं के कारण किसानों की फसल ही नष्ट हो जा रही है।
झुंड के झुंड छुट्टा पशु किसी भी किसान के खेत में जब पहुंच जाते हैं तो उनको भगा पाना किसानों के लिए मुश्किल हो जा रहा है। इस बीच पशुओं के कारण पूरी फसल नष्ट होने की संभावना बनी रहती है। इस समय गेहूं की बुआई की गई हैं। गेहूं व अन्य फसलों को बचाने के लिए किसान रतजगा करने को विवश हैं। उधर, किसानों की इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। विधानसभा चुनाव भी नजदीक है, लेकिन राजनीतिक दल व दावेदार भी इस समस्या के प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। नगर क्षेत्र में नगरपालिका की ओर से भी छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। कुछ दिन पूर्व दो-तीन दिन तक अभियान चलाया गया था। उस दौरान छुट्टा पशुओं को पकड़कर टांडा फाल स्थित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल भेजा गया, लेकिन उसके बाद वह भी बंद हो गया। अब स्थिति यह है कि नगर में अधिकांश जगहों पर बीच सड़क पर छुट्टा पशु बैठे मिल जाते हैं। इससे आवागमन प्रभावित होता है। कभी-कभी छुट्टा पशुओं की चपेट में आकर नागरिक भी घायल हो जा रहे हैं। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर के अधिशासी अधिकारी ओमप्रकाश का कहना है कि छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। विधानसभा चुनाव को लेकर कर्मचारियों की व्यस्तता बढ़ गई है। इसलिए उसमें कुछ व्यवधान जरूर हुआ है, लेकिन अभियान जारी रहेगा।