लालगंज। राष्ट्रीय राजमार्ग 135 के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन सुगम हुआ है, लेकिन हाईवे से जुड़े ग्रामीण और कस्बाई बाजारों के लिए अब तक ठोस व्यापारिक ढांचा विकसित नहीं हो सका है। इससे स्थानीय किसान और व्यापारियों को हाईवे का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जहां वह अपने कृषि उत्पाद बाहरी राज्यों की मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। वहीं दूसरे प्रदेशों की मंडियों से आने वाला सामान भी हाईवे के अगल-बगल बसे बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
लालगंज के युवा व्यापारी विजय अग्रहरि, शिवा केसरवानी और अनिल केसरवानी ने कहा कि हाईवे को केवल ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में नहीं बल्कि व्यापारिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। यदि दूसरे प्रदेशों की बड़ी मंडियों से फल, सब्जी और कृषि उत्पाद सीधे हाईवे किनारे के बाजारों में आने लगे और स्थानीय उत्पाद भी बाहर भेजे जाएं तो यह व्यवस्था दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगी। व्यापारियों का कहना है कि अभी स्थिति यह है कि बाहर का माल शहरों तक ही सिमट जाता है। हाईवे से सटे बाजार सिर्फ़ दर्शक बने रहते हैं। इससे न तो प्रतिस्पर्धा बन पाती है। न ही कीमतों में संतुलन।
यदि हाईवे किनारे व्यवस्थित थोक बाजार, कलेक्शन पॉइंट और लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएं तो क्षेत्रीय व्यापार को नई दिशा मिल सकती है। किसान रमेश और धर्मेंद्र का कहना है कि जब तक हाईवे से जुड़े बाजारों को अंतरराज्यीय मंडियों से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे बड़े प्रोजेक्ट का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचेगा। संवाद