फोटो- विंध्याचल मार्ग पर भैरो मंदिर के पास चिन्हित विरासत वृक्ष।- संवाद।
- फोटो : कोहरे के बीच लाइट जलाकर गुजररा बाइक सवार।
मिर्जापुर। जिले में सौ वर्ष से ऊपर के पेड़ों को वन विभाग की तरफ से संरक्षित कर उसे विरासत वृक्ष का दर्जा प्रदान कर देखभाल की जाएगी। पीपल, पाकर, बरगद, महुआ को विरासत वृक्ष का दर्जा प्रदान किया जाएगा।
मिर्जापुर रेंज, लालगंज रेंज, मड़िहान रेंज, चुनार रेंज, ड्रमंडगंज रेंज, पटेहरा रेंज, सुकृत रेंज व विंढमफाल रेंज को मिलाकर वन विभाग की तरफ से अबतक कुल 37 विरासत वृक्ष चिन्हित किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि सौ वर्ष से लेकर उसके ऊपर तक जिले में अभी तक 37 विरासत वृक्ष चिन्हित किया गया है। डीएफओ ने बताया इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होने कहा अगले माह से सभी रेंजों में ग्राम स्तर पर अभियान चलाकर पुराने वृक्षों को चिन्हित किया जाएगा।। डीएफओ ने बताया चिन्हित विरासत वृक्षों की वन विभाग की तरफ से न सिर्फ उसकी देखभाल की जाएगी बल्कि उसके महत्व और पेड़ के नीचे पूर्व में होने वाले आयोजन आदि के बारे में ग्रामीणों को बताकर उन्हे जागरुक किया जाएगा। साथ ही पीपल, बरगद, पाकड़ महुआ आदि वृक्षा की नश्ले तैयार कर उसे अन्यत्र स्थानों पर भी विकसित किया जाएगा।
मिर्जापुर। विरासत वृक्ष के रुप में वन विभाग की तरफ से अभी तक 150 से लेकर 200 वर्ष तक के वृक्षों का चयन किया गया है। ज्यादातर वृक्ष 100, 120, 130 व 200 वर्ष के वृक्ष शामिल हैं।
मिर्जापुर रेंज के मलाधरपुर मे 200 वर्ष पुराना बरगद वृक्ष है। जहां पहलवान बाबा का मंदिर स्थापित है। जहां अखाड़ा तैयार कर कुश्ती भी लड़ी जाती है। ग्रामीणों की मान्यता है कि बरगद के वृक्ष सर्प रहने से यहां पर नाग पंचमी को विशाल मेला का भी आयोजन किया जाता है। इसी गांव में 150 वर्ष पुराना बरगद का पेड़ है जहां महिलाएं वट सावित्री पूजा पूजन करती हैं। इसी तरह विंध्याचल मार्ग पर कंतित से पहले भैरो मंदिर के पास 130 वर्ष पुराना पीपल वृक्ष है। जिसकी काफी महत्ता है।