सक्तेशगढ़। स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि सद्गुरु की प्राप्ति बाहरी प्रयासों से नहीं, बल्कि ईश्वर के शरण, श्रद्धा और नाम-स्मरण से होती है। कहा कि जो व्यक्ति समर्पण भाव से ईश्वर का स्मरण करता है, उसे स्वयं ईश्वर योग्य सद्गुरु से मिलाते हैं। इसलिए सद्गुरु की खोज भटककर नहीं, बल्कि ईश्वर की शरण में जाकर करनी चाहिए।
प्रवचन में उन्होंने कहा कि ‘’ॐ’’ का निरंतर जप मन और आत्मा को पवित्र करता है। दिनभर में जब भी अवसर मिले, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ ईश्वर का नाम जपते रहना चाहिए। इससे अंतःकरण निर्मल होता है और साधक को सद्गुरु की कृपा प्राप्त होती है। सद्गुरु ही मनुष्य को सही मार्ग दिखाकर जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाते हैं। स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने आध्यात्मिक उन्नति के लिए अहंकार, लोभ और मोह का त्याग करने पर बल देते हुए सत्य, सेवा, संयम और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित साधना, सत्संग और ईश्वर के नाम-स्मरण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। संवाद