मिर्जापुर। बारिश थमने के दूसरे दिन शुक्रवार को गंगा में बाढ़ के तेवर ढीले पड़ गए। चार दिनों तक लगातार बढ़ने के बाद शुक्रवार सुबह पांच बजे से जलस्तर कम होना शुरू हो गया। पहले एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा पानी दोपहर बाद दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उतरने लगा। इससे बाढ़ प्रभावित तटवर्ती इलाकों में लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन खेतों से पानी हटते ही सड़ी फसलों की दुर्गंध ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
बृहस्पतिवार रात आठ बजे से गंगा का जलस्तर 76.050 मीटर पर स्थिर था। पूरी रात गंगा का जलस्तर स्थिर रहा। शुक्रवार सुबह पांच बजे से पानी घटना शुरू हुआ और सुबह आठ बजे तक जलस्तर 76.010 मीटर पहुंच गया। दोपहर बाद गिरावट की रफ्तार बढ़ गई। शाम चार बजे तक जलस्तर घटकर 75.890 मीटर रह गया।
बताते चलें कि मंगलवार से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हुई थी। चार दिनों में जलस्तर 75.510 मीटर से बढ़कर बृहस्पतिवार को 76.050 मीटर तक पहुंच गया था। गंगा का चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर और खतरे का निशान 77.724 मीटर है। पानी घटने के साथ विभिन्न मार्गों पर जमा बाढ़ का पानी भी धीरे-धीरे उतर रहा है। हालांकि कोन, पहाड़ी, नरायनपुर और सीखड़ ब्लॉक के गंगा तटवर्ती क्षेत्रों में पानी में डूबी फसलों के सड़ने से सिवानों में भीषण दुर्गंध फैलने लगी है।