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आलू सड़ने से किसानों का हुआ नुकसान

Wed, 14 Dec 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
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नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर तहसील क्षेत्र के आलू किसानों पर पड़ा है। एक माह के अंदर किसानों के कई लाख के सैकड़ों क्विंटल आलू खरीदार के अभाव में सड़ गए। नोट बंदी की घोषणा होते ही एकाएक आलू की खपत ठप होने से किसानों के पास कोल्ड स्टोरेज का किराया भी नहीं बचा कि वह अपने आलू को सहेज सकें। नतीजन कोल्ड स्टोर से आलू बाहर आ गया और बिक्री न होने से सड़ गया। किसानों ने सरकार से अपने उत्पाद के नुकसानी के भरपाई के लिए मुआवजे की मांग किया है। 
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गौरतलब है कि तहसील चुनार का विकास खंड नरायनपुर, सीखड़ व राजगढ़ के सैकड़ो गांव के हजारों बीघे खेत पर हर साल किसान आलू की खेती करते हैं और अपने उत्पाद की अच्छी कीमत के लिए उसको आस पास के कोल्ड स्टोरेज में जमा कर देते हैं। जहां से वह पूरे साल अपने आलू की बिक्री करते हैं। बाढ़ और लगातार सूखे से बेहाल हो चुके आलू उत्पादक दीनानाथ सिंह, सतीश सिंह, गुरूदत्त सिंह, छोटेलाल, गांगपुर के राममोहन सिंह, कैलाश सिंह, रामकेवल, विनोद सिंह, रमेश सिंह व गंगाराम बताते हैं कि क्षेत्र के किसान आलू के पैदावार से काफी प्रसन्न थे, लेकिन बाढ़ और सूखे के बाद नोटबंदी के मार से उनकी कमर टूट गई है।

किसानों ने कहा कि  वह अपने आलू को कोल्ड स्टोरेज में रख कर बेच रहे थे। बाहरी व्यापारी आ रहे थे। नोट बंदी के पहले आलू का भाव आठ से नौ सौ रुपये कुंतल था। जो नवंबर माह से घट कर दो सौ से ढाई सौ रुपये कुंतल पर आ गया। कोल्ड स्टोर का किराया डेढ़ सौ और बिक्री दो सौ रुपये प्रति कुंतल है, नतीजन कोल्ड स्टोर से आलू बाहर आ गया और ग्राहक न होने से सड़ गया।
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रामराज सिंह पटेल ने बताया कि विकास खंड नरायनपुर के बगही, रैपुरिया, जमालपुरमाफी, नकहरा, गांगपुर, भवानीपुर, चंदापुर, रमरापुर, बघेड़ी, बघेड़ा, पचेवरा, सहसपुरा राजगढ़ के सोनउर जमुहार नुआवं बकियाबाद तो सीखड़ ब्लॉक के धनैता, चौधरीपुर, बसारतपुर, मझंवा, अदलपुरा, मरहछ आदि गांवों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर किसान करते हैं और आलू के थोक खरीददार दूर दराज के इलाके से चुनार आते हैं। सीधे कोल्ड स्टोर से आलू उठा कर अपने क्षेत्र में ले जाकर उसकी बिक्री करते है। क्षेत्र के सैकड़ों किसान आलू की खेती के भरोसे ही रहते हैं, जिनकी कमर टूट गई है और वह कर्ज में चले गए हैं।
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