हरे वृक्षों की कटाई जोरों पर, जंगल हो रहे विरान
-अतिक्रमण कर बन रहे घर, मकान व खेतीबारी से सिकुड़ रहे जंगल-पहाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। वन क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहे हरे वृक्षो की अवैध कटाई से जंगल विरान हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष पौधरोपण के नाम पर विभाग की ओर से लाखों पेड़ तो लगाए जाते हैं। लेकिन अधिकांश पौधे जंगलों में नजर नहीं आते। बचेखुचे पेड़ भी विभाग की उदासीनता के चलते प्रति वर्ष आग की भेंट चढ़ जा रहे हैं।
विंध्याचल, देहात कोतवाली, पड़री, चुनार, मड़िहान, लालगंज, जिगना थाना क्षेत्रों में वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर लोगों द्वारा घर, मकान व जमींनो पर खेती-बारी तक किया जा रहा है। विंध्याचल थाना क्षेत्र के दुहौआ, मगरदाकला, अरगजा पांडेय, दुबरा पहाड़ी, करनपुर, महुवारीकला आदि गांव में वन भूमि पर न सिर्फ कब्जा किए गए हैं बल्कि दुहौआ में कुछ लोगों के प्रधानमंत्री आवास तक बना दिए गए हैं। मजे की बात तो यह कि वनों की रखवाली के लिए वन रेंज में वाचर, वन दरोगा के साथ ही अन्य कर्मचारी तैनात हैं बावजूद इसके जंगलों से प्रतिदिन हरे व सूखे पेड़ धड़ल्ले से काटे जा रहे है। अवैध वनों के कटाई से न सिर्फ प्राकृतिक संपदा की छति हो रही है। बल्कि क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन की वजह से बरसात में भी तेजी से गिरावट आ रही है। कोरोना महामारी के इस दौर में आक्सीजन की कमी से लोगों को दम तोड़ते हुए भी देखा जा रहा है। लेकिन वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी लापरवाह बने हुए हैं। सूत्रों की मानें तो पेड़ों की कटाई होते समय ही वनकर्मियों को खबर रहती है लेकिन मौके पर कोई वनकर्मी नहीं पहुंचता। जिसकी वजह से अवैध कटान में लगे लोगों के हौसलें बढ़े रहते हैं। समय रहते वनों की कटान पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में जंगल का आस्तीत्व खत्म होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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डीएम व सीडीओ द्वारा रोपित पौधों का ग्राम पंचायत नहीं कर सका संरक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। प्रत्येक वर्ष पर्यावरण दिवस पर वन विभाग समेत अन्य विभागों की ओर से पौधरोपण तो किए जाते हैं। लेकिन रोपे गए पौधों की देखभाल नहीं की जाती है। परिणाम यह दूसरा सीजन आते-आते पौधे अपनी स्थान से गायब देखे जाते हैं।
सिटी विकास खंड के खरहरा में तत्कालिन जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की ओर से हुए पौधरोपण का ग्राम पंचायत की ओर से संरक्षण नहीं किया जा सका। रख-रखाव के अभाव में तालाब सफाई के दौरान रोपित पौधे अपने स्थान से गायब हैं। चुनार: तहसील क्षेत्र में विभिन्न सरकारी संस्थानों की ओर से सार्वजनिक स्थलों पर पौधे लगाये तो जाते हैं लेकिन इनमें अधिकांश पौधे देखरेख व समय से पानी न मिलने पनपने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। पिछली बार पालिका क्षेत्र में लगभग पांच हजार पौधे लगाए गये थे। इस समय ढूढ़ने पर शायद ही 500 पौधे नजर आएं। कछवा: आदर्श नगर पंचायत में पौधरोपण के नाम पर भारी गोलमाल किए गए हैं। लाखों रुपए की लागत से पौधे रोपे गए थे। चिराग लेकर ढूढ़ने पर पौधे नजर नहीं आएंगे। पिछले वर्ष पौधरोपण के लिए सड़क के किनारे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए उसमें पौधारोपण नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर पौधारोपण बाद उसको देखने वाला कोई नहीं। परिणाम या तो सूख गए या फिर पशुओं के आहार बन गए।
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इस वर्ष पौधरोपण का लक्ष्य - 68 लाख
-30 लाख वन विभाग व अन्य 26 विभागों द्वारा किए जाएंगे पौधरोपण