शारदीय नवरात्र मेले को देखते हुए विंध्य कारिडोर की भव्यता और भी बढ़ा दी गई है। इस दौरान मां विंध्यवासिनी का दरबार रंगीन लाइट, चुनरी और फूलों से सजाया गया है। जिससे दरबार का एक अलग स्वरूप नजर आ रहा है। मां विंध्यवासिनी दरबार से जुड़े प्रमुख मार्ग पर छायादार टेंट लगाया गया है।
धक्क मुक्की से बचाने के लिए स्टील की बैरिकेडिंग, एच एम डी मशीन एवं पंडा समाज व पुलिसकर्मी की निगरानी में श्रद्धालु माता के दरबार तक पहुंचेंगे। इसके लिए चार प्रमुख मार्ग बनाया गया है।
प्रथम गणेश द्वार वीआईपी व आम श्रद्धालु के लिए नया वीआईपी मार्ग से कतार में खड़े होंगे, वहीं विशिष्ट अतिथियों के लिए राधा कृष्ण मंदिर से होते हुए पहुंचेंगे, झांकी दर्शन करने के लिए सदर बाजार कोतवाली मार्ग से होकर भक्त पहुंचेंगे।
द्वितीय प्रवेश द्वार के लिए भक्त पक्का घाट एवं जयपुरिया मार्ग से होकर मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा मंदिर के छत पर एवं कारिडोर के द्वितीय तल पर साधक मां की आराधना व अपने बच्चों का मुंडन संस्कार भी करेंगे।
24 घंटे मां विंध्यवासिनी के होंगे दर्शन, नहीं लगेगा शयन
शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी की शयन आरती नहीं की जाएगी। मेले को देखते हुए चार पहर होने वाली आरती के समय में परिवर्तन किया गया है। मंगला आरती भोर में 3:00 बजे 4:00 बजे तक, राजश्री आरती दोपहर 12:00 बजे से 1:00 तक, सायं काल संध्या आरती 7 बजे से 8 बजे तक तथा बड़ी आरती शृंगार 9:30 बजे से 10:30 तक होगी। इस दौरान दोपहर एवं रात में मां की शयन आरती नवरात्र मेले के दौरान नहीं होंगी। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए माता का दरबार भक्तों के लिए 24 घंटे खुला रहेगा।
पंडा समाज की ड्यूटी निर्धारित
शारदीय नवरात्र के दिनों देश प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु आसानी से माता का दर्शन-पूजन कर सकें। श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारियों की भी ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। पंडा समाज के पदाधिकारी एवं सदस्यों की दो, दो घंटे के लिए ड्यूटी लगाई जाएगी। अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि नवरात्र मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के सुख-सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा। ताकि उन्हे किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।
गंगा में भले ही जलस्तर घट रहा हो पर बाढ़ के पानी को देखते हुए कई घाटों पर स्नान ध्यान प्रतिबंधित कर दिया गया है। तीन घाटों को छोडकर आस्थाधाम स्थित मलहिया घाट, इमली घाट, गोदारा घाट, परशुराम घाट, भैरव घाट, बाबू घाट, चिकन टोला घाट, कच्चा घाट पर श्रद्धालु स्नान ध्यान नहीं कर सकेंगे। सिर्फ दीवान घाट, पक्का घाट व अखाड़ा घाट पर श्रद्धालु मां गंगा में डुबकी लगा सकेंगे।