स्वच्छता के मामले में सिटी विकास खंड में गंगा के किनारे वाले गांवों की दशा खराब है। तैनात सफाईकर्मियों के बावजूद गंगा के किनारे गंदगी हवा में उड़ रही है। जबकि यह प्रधानमंत्री के प्राथमिकता वाले योजनाओं में शामिल है। बावजूद इसके साफ-सफाई मामले में गंगा के किनारे वाले गांवों की दशा सुुधरने का नाम नहीं ले रही है।
सिटी विकास खंड में पिपराडाड़, गंगाउत, सेमरा, बिहारी, नेवढ़ियां, नौंहा, खुटहां मौनस, सिनहरकला, परवाराजधर, लेड़ू, चपउर व भटौली गांव गंगा के किनारे स्थित हैं। अधिकांश गांव की बस्तियां ठीक गंगा के किनारे स्थित हैं। स्वच्छता अभियान के नाम पर गांवों में डस्टविन से लेकर शौचालय के नाम पर पैसा पानी की तरह बहाया गया बावजूद इसके गांवों की हालत जस का तस हैं। आज भी लोग शौचालय के अभाव में खुले में शौंच जाने को मजबूर हैं। वहीं डस्टविन के अभाव में इधर-उधर पड़ी गंदगियां हवा के सहारे उड़कर सीधे गंगा में पहुंच रही हैं। स्वच्छता अभियान के तहत सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है। फिर भी स्वच्छता अभियान जोर नहीं रहा है। भटौली गांव में पूर्व प्रधानी कार्यकाल में सामुदायिक शौचायल ऐसे स्थान पर विरान जगह बना दिया गया है जहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। मजे की बात तो यह है कि शौचालय की देखरेख के लिए बकायदा समूह को हैंडओवर कर दिया गया बल्कि उसके नाम का मानदेय भी जारी कर दिया है। भटौली ग्राम प्रधान नरायन का कहना है कि उक्त शौचालय पूर्व प्रधानी कार्यकाल में बनाया गया है। शौचालय जब काम नहीं कर रहा तो समूह के नाम जारी होने वाले धन पर रोक लगा दी गयी है। गांव में बबिता, लवकुश, कन्हई, राममोहन, छबिले, विशाल व मानिकचंद आदि कई ऐसे परिवार हैं जो शौचालय के अभाव में आज भी गांव के बाहर खुले में शौंच जाने को मजबूर हैं।