समाज में भाईचारे का माहौल होना चाहिए, इंसान को इंसान से प्रेम करना चाहिए। किसी भी प्रकार से हमे ऐसी कोई भी क्रिया नहीं करनी चाहिए, जिससे दूसरे को कष्ट हो।
मानव जीवन बड़ा अमूल्य है और इस अमूल्य जीवन का हमे पूरा-पूरा उपयोग करके समाज के कल्याणकारी कार्यों में लगाना चाहिए।
यह बातें शनिवार को प्रवचन के दौरान परम पूज्य महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कही।
नगर के मुसफ्फरगंज स्थित वर्धमान पब्लिक स्कूल में अहिंसा यात्रा के तहत पहुंचे जैन मुनि आचार्य श्री महाश्रमण जी ने सद्भावना, नैतिकता और नशा मुक्ति को यात्रा को प्रमुख उद्देश्य बताते हुए कहा कि आदमी अपने कर्म के अनुसार फल भोगता है।
कर्म करने में आदमी को जागरूक रहना चाहिए। भारतीय दर्शन में विवेचित व जैन दर्शन में विस्तार से वर्णित कर्मवाद पर आचार्य श्री महाश्रमण जी ने कहा कि पूर्वार्जित कर्मों को भोगे बिना किसी को छूटकारा नहीं मिलता।
अहिंसा यात्रा के तहत विद्यालय परिसर में आयोजित एक दिवसीय प्रवचन के दौरान उन्हाेंने कहा कि व्यक्ति को 18 पापाें से स्वयं को बचाने का प्रयास करना चाहिए, जिसके लिए व्यक्ति को आत्म शुद्धि की साधना करनी चाहिए। परमपूज्य ने नशा पर बोलते हुए कहा कि पहले नशा को हम खाते हैं और फिर नशा हमें खा जाता है।
भारत, नेपाल व भूटान सहित भारत के 12 राज्यों में करीब दस हजार किमी अहिंसा यात्रा के तहत मिर्जापुर पहुंचे मुनि ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन में सद्भावना रहे और वह जनकल्याण का कार्य करते रहे।
इसके पूर्व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत रविदास नगर के सांसद वीरेंद्र सिंह ने यात्रा को कल्याणकारी बताया।
कार्यक्रम का संचालन महावीर प्रसाद सेठिया ने किया। इस अवसर पर भीकमचंद, सुशीला देवी पुगलिया एवं महिला मंडल सदस्याआें ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इस दौरान कैलाश सिंह, भीकमचंद सेठिया, विरेंद्र मातू, अश्विनी जैन, पूनमचंद जैन, राजो जैन, सपना जैन, मयंक जैन, पूर्व पालिकाध्यक्ष दीपचंद जैन, अरूण जैन, प्रविता जैन, संजीव जैन ने स्वागत में भावाें की अभिव्यक्ति दी।