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तालाबों के अतिक्रमण पर प्रशासन गंभीर नहीं

Mon, 13 Jun 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
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नगर के कजरहवा के पोखरे पर चारों तरफ किया गया निर्माण। पोखरे पर हर वर्ष कजरहवा मेला लगता है। - फोटो : mirzapur
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कभी तालाबों की नगरी के रूप में पहचान रखने वाले मिर्जापुर से तालाबों का अस्तित्व मिटता जा रहा है। हाल यह है कि अब यहां पशुओं को पानी पीने के लिए भी तालाबों में जल नहीं है। कई तालाबों को पाट कर घर बना लिया गया है तो कुछ को भू माफियाओं ने चहारदीवारी से घेर कर पटवाना शुरु कर दिया है।
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प्रशासन तालाबों से अतिक्रमण हटाने की बजाय खुद ही कई स्थानों पर अतिक्रमण करने सहभागिता निभा रहा है। 


कोन ब्लाक के चिंदलिक गांव में आरईएस विभाग ने तालाब को पाट कर वहां सड़क बना दिया है। जब प्रशासन ही ऐसा कर रहा है तो अतिक्रमणकारियों को शह मिलना स्वाभाविक है। बता दें कि जिले में कई दर्जन स्थान ऐसे हैं जहां तालाबों पर अतिक्रमण कर उसका नामों निशान मिटा दिया गया है। कभी शहर में ही इतने तालाब थे कि तालाब किनारे बैठ कर लोग थकान मिटा लेते थे लेकिन अब तालाब दिखते ही नहीं है। 


शहर के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले भरुहना में ही आधा दर्जन तालाबों को पाट कर वहां मकान बना दिए गए हैं।


शुक्लहा में सोनकर बस्ती और चौहान बस्ती के पास तालाब थे जिनका अब  पता नही है। लठिया, पांडेयपुर, पक्के पोखरा,  कजरहवा पोखरा, भटवा पोखरी, उपाध्याय की पोखरी, विसुंदरपुर, फतहां आदि इलाकों में कभी तालाबों में खूब पानी हुआ करता था लेकिन वर्तमान में इनमें से कई तालाबों में अब न तो पानी है और न ही कुछ तालाबों का अता पता ही है।  
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इसी तरह मझवां ब्लाक के बरैनी, महाबलपुर, केवटाबीर, जमुआ बाजार में तालाबों पर अतिक्रमण किया गया है। वहीं छानबे ब्लाक के कई इलाकों में तालाबों पर अतिक्रमण किया गया है लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद इन इलाकों में तालाबों से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है।
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