फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: शिक्षक दिवस के एक दिन पहले टीचर ने लगाया फंदा, प्रयोगशाला में लटका मिला शव; पीईटी के प्रभारी बनाए गए थे

Thu, 04 Sep 2025 11:12 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर।

सार

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में शिक्षक के फंदा लगाने की सूचना पाकर माैके पर कछवां थाने की पुलिस भी पहुंच गई। श्रीगांधी विद्यालय इंटर कॉलेज के लोगों से जानकारी लेने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
विज्ञापन
शिक्षक दिवस के एक दिन पहले टीचर ने लगाया फंदा। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Mirzapur News: शिक्षक दिवस के एक दिन पहले कछवां थाना क्षेत्र स्थित श्रीगांधी विद्यालय इंटर कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. दिलीप सिंह का गुरुवार की दोपहर रसायन विज्ञान के प्रयोगशाला में पंखे पर फंदे से लटका शव मिला। प्रशिक्षण के लिए दिलीप सिंह को खोजते हुए विद्यालय के अध्यापक प्रयोगशाला पहुंचे तो दरवाजा बंद मिला। दरवाजा तोड़ा गया तो वह फंदे पर लटके थे।

विज्ञापन


वाराणसी के चोलापुर थाना क्षेत्र के सहमलपुर निवासी डॉ. दिलीप सिंह (57) साल 1996 से गांधी विद्यालय में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक पद पर कार्यरत थे। वह मोहनसराय में मकान बनाकर परिवार के साथ रहते थे। पत्नी मंजुला सिंह वाराणसी के राजातालाब प्राथमिक स्कूल में अध्यापक हैं। 

डॉ. दिलीप सिंह का पुत्र अमन सिंह लखनऊ में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। पुत्री आयुषी सिंह कानपुर से एम.फॉर्मा कर रही है। डॉ. दिलीप सिंह सुबह सात बजकर 20 मिनट पर विद्यालय पहुंचे। जहां पर पीईटी की परीक्षा थी। 

विज्ञापन

खोज रहे थे अन्य शिक्षक

इसका प्रभार डॉ. दिलीप सिंह को दिया गया था। इसके लिए साढ़े 12 बजे कक्ष निरीक्षकों का प्रशिक्षण होना था। जब प्रशिक्षण के लिए अध्यापक पहुंचे तो प्रभारी दिलीप सिंह के नहीं मिलने पर उनको फोन किया गया। जब फोन नहीं उठा तो अध्यापक उनको विद्यालय में खोजने लगे। वह कहीं नहीं दिखाई पड़े। इसके बाद अध्यापक रसायन विज्ञान प्रयोगशाला के पास आए। 

दरवाजा खोलना चाहा तो अंदर से बंद मिला। लोग दरवाजा पीटकर आवाज देते रहे पर दरवाजा नहीं खुला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया तो दिलीप सिंह पंखे से लटके मिले। इसकी जानकारी कछवां थाना पुलिस को दी गई। थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने ने फोरेंसिक टीम को सूचना दी। 

टीम ने जांच पड़ताल कर शव को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस की सूचना पर परिजन भी पहुंचे। पत्नी मंजुला सिंह बेहोश हो गईं। आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। कुछ दिन पहले स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते वह हरिद्वार गए थे। वहां से लौटने के बाद यह कदम उठाया।

दिलीप सिंह ने प्रयोगशाला में पंखे के सहारे फंदे पर लटककर जान दे दिया। सीसीटीवी फुटेज में भी यह दिखाई दिया है। परिवार से बात करने पर पता चला है कि बीमारी को लेकर वह परेशान थे। - अमर बहादुर, सीओ सदर

शिक्षकों ने जताया शोक
रसायन विज्ञान के प्रवक्ता डॉ. दिलीप सिंह ने प्रयोगशाला में फंदा लगाने पर शिक्षकों ने शोक जताया है। शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री शिक्षक नेता राजेंद्र तिवारी के पुरानी दशमी स्थित आवास पर संगठन के पदाधिकारी एवं शिक्षकों ने शोकसभा की। 

वक्ताओं ने घटना पर दुख प्रकट किया। शिक्षक नेता राजेंद्र तिवारी ने कहा कि यह समझ से परे है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस को घटना की जांच करनी चाहिए। कहा कि कारणों का पता किया जाए दोषी को दंडित किया जाए। जिला मंत्री सागरलाल सोनकर, मंडलीय अध्यक्ष सुधीर सिंह, प्रशांत वर्मा, नरेंद्र श्रीवास्तव, विनोद मिश्रा, पंकज श्रीवास्तव, आदि शिक्षक मौजूद थे।
विज्ञापन

10 साल पहले शिक्षक ने बनवाया था मकान
कछवां मिर्जापुर में फंदा लगाकर जान देने वाले शिक्षक दिलीप कुमार अपनी पत्नी के साथ मोहनसराय के बसंत पट्टी में घर बनवा कर रहते थे। यहां पर उनका मकान लगभग 10 साल पहले से ही बना हुआ है। पत्नी मंजुला सिंह की प्रथम नियुक्ति आराजी लाइन में ही प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। तब से वह विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत थी।

सहायक अध्यापक से हेड मास्टर बनने के बाद में जमीन बैरवन में प्राथमिक विद्यालय में हेड मास्टर के पद पर कार्यरत थीं। गुरुवार को शिक्षक दिवस के पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में वह हिस्सा लेने के लिए राजातालाब ब्लॉक संसाधन केंद्र पहुंची थीं। जहां पर उन्हें फोन पर घटना की जानकारी मिली। वहीं पर उनके रिश्तेदार शिक्षक सुरजीत कुमार भी आए हुए थे।

सूचना मिलने के बाद दोनों लोग ब्लॉक संसाधन केंद्र से कछवां के लिए चले गए। ब्लॉक संसाधन केंद्र पर जुटे शिक्षक इस सूचना को सुनकर हतप्रभ रह गए। शिक्षकों ने बताया कि दिलीप सिंह काफी सरल स्वभाव के थे। ऐसी घटना क्यों घटी लोग समझ नहीं पा रहे थे। जबकि बच्चे भी पढ़ाई में काफी तेज थे और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें