उरमौरा स्थित बीएसए कार्यालय में कर्मचारियों की खाली पड़ी कुर्सियां।
उत्तर प्रदेश शासन ने सहायक अध्यापकों की भर्ती में सोनभद्र के बीएसए अमरनाथ सिंह और मिर्जापुर के बीएसए मनभरन राम को फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सचिव अजय कुमार सिंह ने जांच में दोषी पाए जाने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन पर सोनभद्र में आठ शिक्षकों की फर्जी नियुकि्त की थी जबकि मिर्जापुर में भी कई अध्यापकों को फर्जी तरीके से नियुक्त किया गया है। शिक्षकों की नियुक्ति के समय मनभरन सोनभद्र में तैनात थे। उन्हें बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध किया गया है। इस मामले की जांच सितंबर 2016 से चल रही थी और 26 मार्च को वर्तमान बीएसए अमरनाथ ने आठों शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त कर दी थी।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में यूपी सरकार ने 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू की थी। तब यहां मनभरन राम राजभर बीएसए थे। इसके बाद उनका तबादला मिर्जापुर के लिए इसी पद पर हो गया और मिर्जापुर के तत्कालीन बीएसए अमरनाथ सिंह सोनभद्र आ गए। वह वर्तमान में भी यहां बीएसए हैं। नियुक्ति के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने तत्कालीन डीएम से शिकायत की थी कि बीएसए और संबंधित लिपिक की मिलीभगत से आठ शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति की गई है। तब तत्कालीन डीएम ने मामले की जांच का आदेश एडीएम रामचंद्र को दिया। एडीएम ने जब जांच की तो परत-दर-परत खुलती गई। फर्जी नियुक्ति के लिए विभागीय स्तर पर पत्रवालियों में जमकर खेल किया गया था।
जांच के बाद एडीएम रामचंद्र ने सात फरवरी 2017 को जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। फिर 26 मार्च को डीएम के निर्देश पर बीएसए अमरनाथ सिंह ने आठों शिक्षकों कौशांबी निवासी रश्मि तिवारी, राधेश्याम, रीनू देवी, उपेंद्र, फतेहपुर निवासी अंशू देवी, मंजू देवी, नीलू देवी और कानपुर नगर निवासी अंजू सिंह की नियुक्ति को निरस्त कर दिया। डीएम ने इस मामले में कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट शासन को भेज दिया था। सोमवार को शासन ने दोनों बीएसए को निलंबित कर दिया और उन्हें बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया है।