मिर्जापुर। विंध्याचल थाना क्षेत्र के अष्टभुजा पहाड़ी पर हुए खलासी सुनील कुमार बिंद हत्याकांड का खुलासा पुलिस अधीक्षक ने रविवार को पुलिस लाइन के मनोरंजन कक्ष में किया। पुलिस ने हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही हत्या में प्रयुक्त गमछा व पत्थर के टुकड़े को भी बरामद किया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2012 में सुनील के परिजनों ने हत्यारोपी के चाचा को मारा पीटा था। इससे उनकी मानसिक स्थिति सही नहीं है। पुरानी रंजिश के चलते खलासी की हत्या की गई थी।
क्षेत्र के मड़गुड़ा निवासी सुनील कुमार बिंद ट्रक का खलासी था। बीते 15 जुलाई को वह घर आया था। बृहस्पतिवार की सुबह अष्टभुजा चौकी क्षेत्र स्थित रोपवे के पास स्थित पोखरे में उसका शव बरामद हुआ। दोपहर में शव की शिनाख्त हुई। इसके बाद उसके बड़े भाई रामसजीवन ने थाने में तहरीर देकर स्टैंड को लेकर हुए विवाद के कारण हत्या की आशंका जताते हुए तहरीर दी। सीओ सिटी प्रभात राय के निर्देशन में विंध्याचल थानाध्यक्ष शैलेश राय और स्वाट प्रभारी रामस्वरूप वर्मा की टीम छानबीन में लगी थी। इसी बीच पता चला कि रात को खलासी सुनील बिंद अपने ट्रक चालक के घर गया था। वहां खाना खाने के बाद घर आ रहा था। रास्ते में अमित विक्रम सिंह अपने साथियों के साथ उसे मिला। उसे शराब पीने के लिए बुलाया। इस दौरान पत्थर से सिर में हमला करने के बाद शव को तालाब में फेंक दिया। पुलिस ने रविवार की सुबह टोल प्लाजा अष्टभुजा के पास से आरोपी अमित विक्रम सिंह उर्फ गोलू, हर्ष विक्रम सिंह, मोहित गिरी निवासी अष्टभुजा मंदिर के बगल को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने बताया कि अमित विक्रम सिंह के परिवार का खलासी सुनील के परिजनों से पुरानी रंजिश चल रही थी। वर्ष 2012 में सुनील के परिजनों ने हत्यारोपी के चाचा लाखन सिंह को मारा पीटा था। इससे उनकी मानसिक स्थिति सही नहीं है। इस कारण रात को रास्ते में मिले सुनील की अमित विक्रम सिंह ने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया। पुलिस अधीक्षक ने गिरफ्तार करने वाली टीम को 15 हजार रुपये के पुरस्कार से पुरस्कृत किया।