मिर्जापुर/अदलहाट। मकर संक्रांति का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति काल में गंगा में लोग पुण्य की डुबकी लगाने के साथ तिल-गुण आदि का दान करेंगे। साथ ही मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भी आस्थावानों की भीड़ उमड़ेगी। इसी के साथ विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्राति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं। उस वक्त शनि मकर राशि का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं। पिता और पुत्र के आपसी मतभेद को दूर करने और अच्छा संबंध स्थापित करने के लिए सूर्य इस दिन शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते है। इसलिए मकर संक्राति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्राति के दिन ही बाणों की शैया पर लेटे भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्याग कर मोक्ष की प्राप्ति की थी। पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति को उर्द की दाल, सरसों के तेल, तिल और गुड़ का दान करने से शनि दोष से छुटकारा मिल जाता है।
कोट-
- मंगलवार को पुनर्वसु नक्षत्र के बाद पुष्य नक्षत्र में दोपहर 3:27 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी समय मकर राशि का मान होता है। मकर संक्रांति का पुण्य काल शाम छह बजे तक रहेगा। - आचार्य पं. चंद्रमौली त्रिपाठी।