पूछताछ में उस समय किसी घर के सदस्य ने कहा था कि फेल होने के चलते इस तरह का नाटक कर रहा है। इसके बाद उसे इलाज के लिए बीएचयू भेजा गया था। वहां से उसे घर ले जाकर सुरक्षित रखने को कहा गया था, क्योंकि रैबिज का असर ब्रेन में पहुंचने के बाद बचना मुश्किल है। हाइड्रोफोबिया का असर दिखा था।
हाइड्रोफोबिया में पानी से डर लगता है। अब अगर सात डोज लगाने से बचने का दावा किया जा रहा है तो पूरा प्रकरण जांच का विषय है। इसमें कई बातें हो सकती हैं। पहला, रैबिज का ब्रेन में पहुंचने पर बचना मुश्किल है। दूसरा, यह हो सकता है कि जिस कुत्ते ने काटा हो, उसे रैबिज का इंजेक्शन लगा हो, इसलिए असर देर से हुआ।
चार की जगह सात इंजेक्शन कैसे लगे
डॉ. अरुण वर्मा ने कहा कि रैबिज के चार इंजेक्शन लगते हैं, ऐसे में सात कैसे लग गए, यह भी जांच का विषय है। एंटीबॉडी की जांच कराने पर पता चलेगा कि क्या हुआ। करन का फॉलोअप उनके द्वारा किया जा रहा था। अब कुत्ते ने काटा या नहीं काटा, काटने के बाद रैबिज का इंजेक्शन लगा तो क्या असर हुआ, यह सब जांच का विषय है। उसकी रैबिज एंटीबॉडी टेस्ट कराया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि शरीर में रैबिज वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बनी है या नहीं।
हरहुआ सीएचसी के डॉक्टर ने बताया, सर्विलांस के जरिये आइसोलेट करने का मिला था निर्देश
करन के पिता भाईलाल ने बताया कि बीएचयू से ट्रॉमा सेंटर और फिर कबीरचौरा अस्पताल गए। कबीरचौरा में पानी डालने पर वह कांपने लगा। जीभ निकालने लगा। बताया गया कि चार-पांच दिन का मेहमान है। उसे कोठरी में बंद कर दो। तब ससुराल से फोन इलाज कराने को कहा। वहां एक व्यक्ति से बात की तो उसने कहा कि छह महीने नहीं बीते हैं, चार महीने बीता है, रैबिज का इंजेक्शन लगवाओ।
20 दिसंबर को कुत्ते ने काटा था
करन ने बताया कि वह आठ दिसंबर को मामा के निधन पर हरहुआ स्थित अपने ननिहाल गया था। वहां 20 दिसंबर 2025 को तेरहवीं के भोज में कुत्ते ने काटा था। 13 मार्च 2026 को उसकी तबीयत खराब हुई।