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Mirzapur News: बौद्ध दर्शन में प्रकृति संरक्षण को विशेष महत्व

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केबी कालेज में आयोजित कार्यशाला में अति​थि को स्मृति चिन्ह देती प्रो. नम्रता मिश्रा, सोशल मीडिय - फोटो : samvad
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केबीपीजी कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) और केबीपीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्तदिवसीय ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण विषय पर चर्चा हुई। प्रथम सत्र में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के इतिहास विभाग की सह-आचार्या डॉ. सीमा मिश्रा ने ‘सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि बौद्ध दर्शन में प्रकृति संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने झीलों, नदियों, वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
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द्वितीय सत्र में काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ज्ञानपुर (भदोही) के दर्शनशास्त्र विभाग के सह-आचार्य डॉ. श्रीप्रकाश तिवारी ने बौद्ध दर्शन में पर्यावरण प्रेम एवं जीवों का संरक्षण’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म अहिंसा और करुणा पर आधारित है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अर्चना पांडेय ने की। कार्यशाला के संयोजक डॉ. कुलदीप पांडेय ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर प्रो. भानुप्रताप सिंह, प्रो. नम्रता मिश्रा, डॉ. रवींद्र प्रताप सिंह, डॉ. राजमणि सरोज, डॉ. आमोद कुशवाहा, डॉ. प्रांकुर आनंद, डॉ. प्रभु नाथ यादव, डॉ. करीम सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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