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भीतरघात की शिकार हुई सपा, अपने प्रत्याशियों का नहीं मिला वोट

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जिला पंचायत सदस्य चुनाव में सबसे अधिक प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के जीते थे। समाजवादी पार्टी शुरु से ही जीत का दावा कर रही थी, पर शनिवार को मतदान के बाद आए परिणाम चौंकाने वाले थे। सपा प्रत्याशी भीतरघात का शिकार हो गईं और उनको महज चार मतों से ही संतोष करना पड़ा। यह हाल तब था जब पार्टी समर्थित 12 प्रत्याशियों ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जीत हासिल की थी। इतना ही नहीं पंचायत सदस्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद सपा ने प्रेसवार्ता कर 18 प्रत्याशियों की जीत का दावा किया था।
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अध्यक्ष पद के लिए नया समर्थन जुटाना तो दूर सपा के पार्टी पदाधिकारी समर्थित प्रत्याशियों को भी सहेज नहीं आए। चर्चा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में निष्क्रियता व आपसी फूट के चलते पार्टी का यह हश्र हुआ। कुछ पदाधिकारियों पर तो यहां तक आरोप लग रहे हैं कि विपक्षी पार्टी की जीत के लिए दावपेच में लगे रहे। वहीं चर्चा है कि बसपाइयों ने भी बैकडोर से भाजपा प्रत्याशी का समर्थन किया।
समाजवादी पार्टी जिला पंचायत चुनाव शुरु होने के बाद से ही अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी ठोक रही थी। चुनाव परिणाम आने पर पार्टी पदाधिकारी खासा उत्साहित नजर आ रहे थे। जिले में जिला पंचायत सदस्य के 44 सीटों पर जनता ने सपा के 12 प्रत्याशियों को जिताया, जिसे पार्टी ने टिकट दिया था। इसमें कुछ ऐसे भी जीते थे, जिसे समाजवादी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, पर जैसे ही परिणाम आया था वे सपा के खेमे में दिखे। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी ने पार्टी के 18 प्रत्याशियों की जीत का दावा करने के साथ ही अध्यक्ष पद के लिए सशक्त दावेदार पार्टी को बता रहे थे। जैसे-जैसे जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करीब आने लगा। समाजवादी पार्टी पत्रकार वार्ता कर अन्य दलों के जीते प्रत्याशियों का समर्थन होने के साथ पूर्ण बहुमत होने का दावा करने लगी। नामांकन वाले दिन तक पूर्ण बहुमत होने का दावा करते हुए भाजपा के प्रत्याशी पर कई आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी जीत का दावा करती रही, पर अपने ही घर में हो रहे भितरघात को लेकर सजग नहीं दिखी। धीरे-धीरे लोगों ने खेमा बदलना शुरू कर दिया। इधर सपा पदाधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अंत में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों ने भी पाला बदल लिया पर पदाधिकारी कुछ नहीं कर पाए। यहीं कारण रहा कि जिला पंचायत चुनाव में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली सपा अध्यक्ष पद के चुनाव में औंधे मुंह गिर गई और समर्थित प्रत्याशी को महज चार वोट से ही संतोष करना पड़ा।
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