अश्विन कृष्ण अष्टमी को महिलाओं ने निराजल रहकर संतान की मंगलकमना की। जीवित्पुत्रिका व्रतधारी महिलाओं ने शाम को जिउतिया माता का पूजन किया। लक्ष्मी जी का भी पूजन किया तथा समूह में कथा सुनी। पूजन-पाठ उपरांत चढ़ाई गई धागे की माला संतान के गले में पहना कर मंगल कामना की।
जीवित्पुत्रिका व्रतधारी महिलाएं सुबह से निराजल रहीं। पूजन स्थल पर व्रती महिलाएं थाल में माला-फूल, मिष्ठान, फल सहित प्रसाद भर कर चढ़ाया और पूजन-अर्चन कर मंगल कामना की। जिउतिया माता का विधिवत पूजन-पाठ के बाद चढ़ाई गई धागे की माला व्रती महिलाओं ने अपने पुत्रों के गले में पहना कर दीर्घायु के लिए कामना की।
नवमी तिथि को सुबह व्रती महिलाएं विधिवत पूजन-अर्चन करने बाद व्रत का पारण करेंगी। शुक्रवार को नगर के प्रमुख बाजारों में पूजन संबंधित वस्तुओं की खरीदारी करने को महिलाओं का रेला लगा रहा। बाजारों मेें पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की भीड़ अधिक दिखी। नगर के संकटमोचन मार्ग सहिज वासलीगंज, घंटाघर, त्रिमोहानी, मुकेरी बाजार, गुड़हट्टी बाजार, पक्केघाट, तेलियागंज, संगमोहाल, महुवरिया, रमईपट्टी, इमामबाड़ा, स्टेशन रोड आदि बाजारों में पूजन सामग्रियां खरीदने महिलाओं का तांता लगा रहा।
शाम को गंगा घाटों पर मिहिलाओं की भीड़ उमड़ी। दौरी और अन्य बर्तनों में पूजन सामग्री लेकर व्रती महिलाएं गीत गाते हुए घाटों पर पहुंची थीं। बरियाघाट पर मेले का माहौल बना रहा। जिउतिया को सबसे कठोर व्रत माना जाता है। 24 घंटे तक महिलाएं निराजल रहोंगी और पारण शनिवार को करेंगी।