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कोई ट्रक चालक तो कोई फालोवर से बना आरक्षी

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पुलिस लाइन ग्राउड में दीक्षांत परेड समारोह में परेड करते जवान। - फोटो : MIRZAPUR
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वर्षों की मेहनत और छह माह के प्रशिक्षण के बाद मंगलवार आरक्षियों के जीवन का सबसे बड़ा और सुखद दिन साबित हुआ। अपने परिवार के सामने दीक्षांत समारोह में परेड करते वक्त कइयों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। देश सेवा का जज्बा लिए आरक्षी बने युवाओं की कहानी भी उतनी ही संघर्षपूर्ण और चुनौती भरी रही। कोई पहले ट्रक चलता था तो कोई फलोवर रहते हुए तैयारी कर अपना सपना पूरा किया। जो किसी भी युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। पीएसी में 292 आरक्षी और पुलिस लाइन में 125 आरक्षियों ने परेड किया। इस दौरान
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ज्यादातर आरक्षी गरीब और मध्यमवर्गी परिवार से हैं। 12 जनवरी से शुरू हुआ प्रशिक्षण 12 जुलाई को समाप्त हुआ। छह माह के प्रशिक्षण में कई तरह की ट्रेनिंग दी गई। इसमें अलग-अलग विषयों की ट्रेनिंग देकर परीक्षा ली गई। जिसमें अलग-अलग समूह में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान में चयनित हुए। सभी परीक्षा में बेहतर अंक पाने वाले को सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी के रुप में चुना जाता है। जो प्रशिक्षण का सबसे बड़ा पुरस्कार है। सर्वांग सर्वोत्तम पुरस्कार पाने के अलावा कई आरक्षी ऐसे हैं, जिनके लिए आज का दिन बहुत खास रहा।
पीएसी में 292 बने आरक्षी, आजमगढ़ के रितुराज बने सर्वांग सर्वोत्तम
39वीं वाहिनी पीएसी मिर्जापुर के आरटीसी प्रशिक्षण केंद्र पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों का मंगलवार को दीक्षांत परेड समारोह संपन्न हुआ। सेनानायक देवेश कुमार पाण्डेय द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि आयुक्त योगेश्वर राम मिश्र ने दीक्षांत समारोह में परेड की सलामी ली। 292 सफल रिक्रूट आरक्षियों को शपथ दिलाया गया। सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी आजमगढ़ के रितुराज सिंह रहे। उनको कंपनी कमांडर के रुप में भी प्रथम पुरस्कार मिला। इस मौके पर राजीव कुमार, उपसेनानायक देवेन्द्र भूषण, दिनेश कुमार सिंह यादव, सहायक सेनानायक परमानन्द पाण्डेय, अरविन्द कुमार, सूबेदार मेजर कान्ता प्रसाद आदि उपस्थित रहे।
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पीएसी के टापर आरक्षी
सर्वांग सर्वोत्तम- रितुराज सिंह
प्रथम समूह- शिव प्रताप चौहान
द्वितीय समूह- अर्जुन कुमार
तृतीय समूह- अभिषेक कुमार मिश्रा
चतुर्थ समूह- शुभम सिंह
पंचम समुह- जागेश्वर प्रसाद
आईटी में प्रथम- अनुराग यादव
पीटी में प्रथम-अरुण कुमार
परेड कमांडर प्रथम- रितुराज सिंह
परेड कमांडर द्वितीय- अभिषेक कुमार
परेड कमांडर तृतीय- रुपेश चंद्र यादव
बेस्ट आईटीआई- धर्मेंद्र कुमार यादव
बेस्ट पीटीआई- अवधेश कुमार
बेस्ट एसआई टीचर- महेंद्र कुमार
जहां रहे फालोवर वहीं ट्रेनिंग लेकर बने आरक्षी
मिर्जापुर। अगर कुछ करने का जज्बा हो तो फिर आप अपना मुकाम हासिल कर ही लेते हैं। ऐसी ही कहानी है सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के खाड़र गांव निवासी जगेश्वर प्रसाद गोड़ की। जगेश्वर प्रसाद तीन भाई व चार बहनों में सबसे छोटे है। उनका जीवन गरीबी में हुआ। पिता श्रीधर किसान थे। मां सुुखनी देवी गृहणी है। उन्होंने स्नातक डाला से किया। बताया कि 2010 में 48वीं वाहिनी में फालोवर के पद पर उनका चयन हुआ। जिसके बाद से वह 39वीं वाहिनी पीएसी मिर्जापुर में फालोवर के पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान वह परीक्षाओं की तैयारी करते रहते थे। 2016 में उनका विवाह संगीता से हुआ। इस बीच 2016 और 2018 के प्रथम भर्ती में उनका चयन नहीं हुआ। 2018 के द्वितीय भर्ती में उनक चयन हुआ। जिसके बाद 39वीं वाहिनी पीएसी में ही ट्रेनिंग किया। कहा कि आरक्षी बनने के बाद भी उनका सफर आगे यूपी एसआई व अन्य परीक्षा पास करने का प्रयास जारी रहेगा।
ट्रक चलाते हुए आरक्षी बने मुसाफिर
आजमगढ़ जिले के जियनपुर थाना क्षेत्र के हरईया निवासी मुसाफिर मौर्या ट्रक चलाते थे। ट्रक चलाते हुए ही उनको पुलिस में जाने की प्रेरणा मिली। बताया कि पिता कोमल मौर्या किसान हैं। वह छह भाई एक बहन में चौथे नंबर पर है। स्नातक की पढ़ाई आजमगढ़ से किया। घर में बड़े भाई चंद्रशेखर ट्रक चलाते थे। बड़ा परिवार था तो समस्याएं भी थी। इसलिए परिवार और भाई का सहयोग करने के लिए ट्रक चलाना सीख और 2011 से ट्रक चलाने लगा। इस दौरान ही रास्ते आर्मी कैंप देखने के बाद सेना में जाने का इच्छा हुई। इसके बाद तैयारी करने लगा। 2018 में जब पुलिस भर्ती आई तो उसमें चयनित हुआ। इस मुकाम पर पहुंचने के बाद उनका परिवार उनके ऊपर फक्र कर रहा है। बताया कि वह योगा में भी चैंपियन है।
पीएसी के सर्वांग सर्वोत्तम रितुराज सिंह
आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के ककरही निवासी रितुराज सिंह पीएसी के दीक्षांत परेड में सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी चुने गए। बताया कि उनके पिता ओमकार सिंह सरकारी अध्यापक और मां शीला देवी गृहणी है। बताया कि 2018 में सीमा सुरक्षा बल और यूपी पुलिस दोनों में ही उनका चयन हुुआ, पर उन्होंने यूपी पुलिस को चुना। परेड कमांडर के रुप में प्रथम पुरस्कार के अलावा सभी 292 आरक्षियों में सर्वांग सर्वोत्तम चुना जाना और अपने आदर्श माता-पिता और चाचा-चाची के सामने यह पुरस्कार लेने से बड़ा दिन नहीं हो सकता है।
बलिया निवासी आशीष कुमार सिंह पुलिस आरक्षी के प्रशिक्षण में सर्वांग और सर्वोत्तम चुने गए हैं। आशीष सिंह दो भाई और एक बहन में सबसे छोटे हैं। बीएससी और बीएड की पढ़ाई की है। बताया कि पिता विजेंद्र प्रसाद सिंह आर्मी से रिटायर्ड है। मां मनभावती देवी गृहणी है। पिता के आर्मी में होने के कारण वर्दी पहनने की तमन्ना थी। इसके लिए तैयारी कर रहा था। 2018 में पुलिस भर्ती परीक्षा पास करने के बाद चयनित हुआ। प्रशिक्षण में जो सीखने को मिला है। उसका उपयोग जीवन में करुंगा।
दो दोस्तों ने साथ की तैयारी और बने आरक्षी
पुलिस लाइन दीक्षांत परेड में दो ऐसे दोस्त भी मिले। जिन्होंने साथ तैयारी की और अब साथ-साथ आरक्षी बने। आजमगढ़ के रसुलपुर तुंगी निवासी राहुल राजभर पुत्र अमीलदार और मार्टिनगंज निवासी उनके साथ प्रमोद यादव पुत्र रामकेश दोस्त हैं। दोनों साथ पढ़ाई करते हुए तैयारी कर रहे थे। 2018 में दोनों पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा दिया। दोनों का चयन हुआ। दोनों ने साथ ट्रेनिंग किया और मंगलवार को परेड में शामिल होकर शपथ लिया।
125 ने किया परेड, बलिया के आशीष बने सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी
पुलिस लाइन परेड ग्राउंड पर मंगलवार को शाम को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान 125 प्रशिक्षणाधीन आरक्षियों परेड किया। परेड की सलामी मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा ने लिया। मुख्य अतिथ पुलिस अधीक्षक ने शपथ दिलाने के बाद सभी को ईमानदारी और लगन के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद अंत: व वाहृय विषयों के अलावा अन्य विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरिक्षियों को पुरस्कृत किया गया। बलिया के आशीष कुमार सिंह को सर्वांग सर्वोत्तम आरक्षी का पुरस्कार मिला। प्रथम समुह में आशीष कुमार सिंह, द्वितीय समुह में धर्मेंद्र कुमार यादव, तृतीय उज्ज्वल यादव, चतुर्थ राहुल राजभर, पंचम मिथिलेश कुमार को पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर एएसपी सिटी संजय कुमार वर्मा, एएसपी नक्सल महेश सिंह अत्रि, सीओ सिटी प्रभात राय, सीओ यातायात अरुण कुमार सिंह, सीओ सदर शैलेंद्र त्रिपाठी, आरआई राम दुलार यादव आदि रहे।
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