जिले में धान खरीद 28 फरवरी तक होनी है। अधिकतर किसानों ने अपना धान बेच दिया है। जो बचे हैं, उनमें से अधिकांश छोटे किसान हैं, जो अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। धान बेचने के लिए छोटे किसानों को क्रय केंद्रों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
नगर में स्थित मंडी समिति परिसर में खुले केंद्रों पर किसानों का आना जारी है। जंगी रोड स्थित मंडी परिषद समिति में बृहस्पतिवार को धान खरीद हुई। बताया गया कि कई किसान आकर लौट गए। कुछ किसानों से खरीद की गई। लोगों का आरोप है कि इस समय चुनाव का माहौल है। लोग प्रशिक्षण या अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इसके चलते कई केंद्रों पर अनियमितता की शिकायत है। अधिकारी भी निर्वाचन कार्य में व्यस्त हैं। इसके चलते उचित ढंग से निरीक्षण भी नहीं हो पा रहा है। क्षेत्रीय विपणन अधिकारी सुरेंद्र पाल का कहना है कि यदि किसी व्यापारी का धान नहीं खरीदा गया तो वह ऐसे ही आरोप लगाता है। क्रय केंद्रों पर पूरी निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ धान खरीद की जा रही है। किसानों के उत्पाद का भुगतान मानक के अनुसार न करने के चलते जिले के 17 धान क्रय केंद्र पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इतनी अधिक संख्या में केंद्र बंद हो जाने से किसानों की परेशानी और भी बढ़ गई है। धान खरीद अंतिम दिन करीब होने के कारण किसान किसी भी तरीके से अपना धान बेचने का प्रयास कर रहे हैं। अब तो केंद्रों पर तौल की मात्रा भी कम कर दी गई है। अब प्रतिदिन मात्र 120 क्विंटल ही धान खरीद की जा सकेगी। उधर, जिले में अब तक 36,532 किसानों से 1,77,423 एमटी धान की खरीद की जा चुकी है। धान खरीद के बदले 89 प्रतिशत भुगतान भी हो चुका है। इस बार 2,29,000 एमटी धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। उधर, धान खरीद के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त होने में केवल 18 दिन रह गए हैं। उधर, उच्चाधिकारियों द्वारा एक कांटा पर मात्र 120 क्विंटल धान खरीद किये जाने का आदेश जारी किया गया है। इसके चलते तमाम किसान धान बेचने से वंचित हो जा रहे हैं। खरीद की मात्रा निर्धारित कर दिए जाने से किसानों में नाराजगी है। किसानों ने धान खरीद की मात्रा नहीं बढ़ाए जाने पर आंदोलन कर चक्काजाम करने की चेतावनी दी है।