शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर विंध्यवासिनी के पूजन के लिए आस्था का रेला उमड़ पड़ा। रविवार को भोर में तीन बजे मंगला आरती के बाद लगी कतार आधी रात तक नहीं टूटी। देश के कोने-कोने से आए साधक सारी रात महानिशा में मंत्र और तंत्र सिद्ध करते रहे।
महाष्टमी पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से मां विशेष शृंगार किया गया। विंध्यधाम में शीश झुकाने के बाद परिसर के सरस्वती, लक्ष्मी, काली, शीतला, दुर्गा, राधा-कृष्ण, दक्षिणमुखी हनुमान, पंचमुखी महादेव एवं बटुक भैरव के विग्रहों की भी पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने नंगे पांव त्रिकोण परिक्रमा की। हवन कुंड एवं मंदिर गुंबद की परिक्रमा भी दिन भर चलती रही। बच्चों का मुंडन कराया गया। मंदिरों की फूल-पत्तियों और रंग-बिरंगे झालरों आकर्षक सजवाट की गई है।
महिलाओं ने मंदिर में हलवा-पूड़ी का भोग लगाया। शहर के विभिन्न स्थानों पर नैवेद्य तैयार किया जाता रहा। लोगों ने अष्टभुजा पहाड़ पर मां काली, मां अष्टभुजी देवी, मां तारा देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।