श्री राघवेन्द्र रामलीला कमेटी की ओर से चल रही 21 दिवसीय रामलीला के आठवें दिन धनुष यज्ञ लीला का मंचन किया गया। लीला मे धनुष तोड़ने के लिए रावण सहित विभिन्न देशों के राजा भी शामिल थे। धनुष तोड़ने के लिए बड़े बड़े राजाओं ने जोर आजमाया लेकिन धनुष तोड़ने की तो दूर कोई उसे हिला तक न सका। श्रीराम के हाथों धनुष टूटने पर परशुराम क्रोधित हुए। राजा जनक ने कहा राजाओं तुमने नाक कटा दी, लगता है कि पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। राजा जनक की बात सुनकर लक्ष्मण क्रोधित होकर बोले कि ऐसे धनुष को उठा कर वह कोसों दूर फेंक सकते हैं। उन्होंने श्री राम से आज्ञा देने का अनुरोध किया। विश्वामित्र लक्ष्मण को शांत होने को कहते हैं। तब जनक ने कहा वीर ही इस तरह की अपमान जनक शब्द सहन नहीं कर सकता है, निश्चित ही इस रंगमहल में वीर मौजूद हैं। गुरू विश्वामित्र के आदेश देने पर श्रीराम ने जैसे ही धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तभी धनुष टूट जाता है। धनुष टूटते ही जनकपुर नगरी के वासियों के रूप में रामलीला देखने आए रामलीला प्रेमियों के जयकारे से नगर गुंजायमान हो उठा। धनुष टूटने के उपरांत परशुराम लक्ष्मण संवाद हुआ और धनुष यज्ञ लीला समाप्त हुआ। इस दौरान जनकपुर नगरी के रूप में रामलीला मंच को फूल मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया था। पेट फुलनहवां राजा अपने नखड़ालू अंदाज से रामलीला प्रेमियों को लुभाते रहे। मंचन में वेंकटेश्वर पांडेय ने विश्वामित्र, प्रकाश पांडेय ने राम, किशन मिश्रा ने लक्ष्मण, लक्ष्मी शंकर पांडेय ने भूमिका निभायी। ब्यूरो
जनक, गोविंद जायसवाल ने रावण व विवेकानंद मिश्र ने परशुराम का अभिनय किया। धनुष यज्ञ की लीला में बचाऊ लाल सेठ, चंद्रहास गुप्ता, अविनाश अग्रवाल, श्यामू गुप्ता, शिवप्रसाद कमल आदि उपस्थित रहे।