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नवरात्र मदर्स डे: मोरारी बापू

Fri, 22 Sep 2017 12:39 AM IST
mirzapur news
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संत मोरारी बापू ।
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प्रख्यात संत मोरारी बापू ने कहा कि फादर्स डे और मदर्स डे पाश्चात्य नहीं भारतीय परंपरा के अनुसार मनाना चाहिए। भारत का मदर्स डे नवरात्र और फादर्स डे महाशिवरात्रि है। रक्षा बंधन को सिस्टर डे मनाना चाहिए। यही नहीं सतगुरु डे गुरुपूर्णिमा पर होना चाहिए। वे कालीखोह मार्ग स्थित रामकथा स्थल पर शाम को भक्तों को संबोधित कर रहे थे।
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नौ दिवसीय कथा का आरंभ करते हुए उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी बैठी मां हैं और गंगा बहती हुई मां हैं। रामचरित मानस मां का ही स्वरूप है । राम ही तत्व है। मानस पाठ से विश्राम अवश्य मिलता है। वहीं गंगा का स्वरूप रामचरित मानस जैसा है । बापू ने कहा कि कुछ समय पूर्व डगमगपुर में कथा आयोजन के समय इस कथा का बीज बोया था। उन्होंने कहा कि साधना करने के लिए शांति और भक्ति की आवश्यकता होती है। तुलसी रचित राम चरित मानस का अर्थ है कि पहले राम फिर चरित तथा अंतिम में मानस का अर्थ है कि मनुष्य के लिए पहले मानस। मुरारी बापू ने व्यास पीठ का अर्थ भी बताया। शक्तिपीठ की व्याख्या करते हुए कहा कि मां की प्रेरणा से ही मैं यह रामकथा कहने आया हूं। यहां सर्वप्रथम अष्टभुजा में काली खोह तथा ज्ञानपीठ माता विंध्यवासिनी के चरणों में आने का मौका मिला। काली खोह में मां काली की जीभ निकली मूर्ति शांति स्वरूप का परिचायक है। इसके पूर्व  कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्रोच्चार से  श्री रमण कृष्णमूर्ति ने किया। अखिलानंद शास्त्री ने ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा कृष्ण के जीवन पर प्रकाश डाला। असोम के बालक बालिकाओं ने कृष्ण के बाल्यकाल पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम व्यवस्था में कृष्ण कुमार जालान, अखिलेश खेमका एवं क्षेत्रीय विधायक रत्नाकर मिश्र जी तथा भूपति मिश्र सहयोगी रहे। इस दौरान जिलाधिकारी विमल दुबे, पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी रहे।
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