नवरात्र मेले के तीसरे दिन विंध्याचल दरबार में लाखों भक्तों ने शीश नवाया। गुड़हल, कमल, गुलाब के पुष्पों से मां का शृंगार किया गया। मां के दिव्य स्वरूप का दीदार करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।
विंध्यवासिनी देवी मंदिर सहित पहाड़ पर विराजमान मां काली एवं मां अष्टभुजी देवी के पावन धाम में दर्शन-पूजन करने का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती के उपरांत दर्शन व पूजन का दौर शुरू हुआ, जो अनवरत चलता रहा। नगर की गलियों में सुबह से ही मां का दर्शन करने को लालायित भक्तों की लंबी कतार लग गई थी।
तरह-तरह के पुष्पों सहित रत्नजड़ित आभूषणों मां का से किया गया भव्य शृंगार का दर्शन कर लोग जयकारे लगाते रहे। हवन-कुंड की परिक्रमा और छत पर मुंडन व जनेऊ संस्कार करने वालों की भीड़ लगी रही। जगह-जगह साधक साधना करने में तल्लीन दिखे। अष्टभुजा पहाड़ पर भक्तों ने पत्थरों का घरौंदा बनाकर मन्नतें मांगी। स्काउट-गाइड व श्री विंध्य पंडा समाज के लोग भक्तों की सेवा में में लगे हुए हैं। विंध्याचल के पक्काघाट पर आयुक्त रंजन कुमार एवं जिलाधिकारी कंचन वर्मा की देखरेख में गंगा आरती शुरू हुई।