सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने सहकारिता के साथी और पुराने समाजवादी सुरेंद्र पटेल पर भरोसा जताया है। उनको तीन बार चुनाव लड़ चुके रविंद्र बहादुर पटेल पर तरजीह दी गई है तो उसके कई कारण है। हालांकि टिकट बदलने से पार्टी के अंदरूनी खेमों में खलबली मच गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे पार्टी दो फाड़ हो सकते हैं।
समाजवादी पार्टी ने पुराने सिपाही रविंद्र बहादुर पटेल की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए पार्टी ने सोनभद्र का जिलाध्यक्ष बनाया था। वे तीन बार विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इस बार भी उनको टिकट दिया था। मड़िहान की सीट पर कांग्रेस के ललितेशपति त्रिपाठी ने कांग्रेस की विपरीत लहर में भी जीत का परचम फहराया था। इस सीट को कांग्रेस से छीनने के लिए सपा ने प्रेक्षकों और संगठन की रिपोर्ट के आधार पर टिकट बदल कर साहसिक कदम उठाया है। अबकी सुरेंद्र सिंह पटेल पर भरोसा जताया गया है जो पुराने समाजवादी नेता हैं। वह सहकारिता आंदोलन से जुड़े हैं। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन हैं। सहकारिता आंदोलन से पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का भी गहरा जुड़ाव है। लिहाजा उन्होंने अबकी बार सहकारिता के अपने साथी पर भरोसा जताया है।
सुरेंद्र सिंह पटेल राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया के करीबी माने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर भी लंबा रहा है और विभिन्न वर्गों में पकड़ है। अधिवक्ता अभिभाषक संघ के अध्यक्ष रह चुके सुरेंद्र सिंह पटेल ने बीएचयू में पढाई के दौैरान राजनीति में कदम रखा। युवा लोकदल और युवा जनता दल में पदाधिकारी रहे। जब सपा बनी तब से उससे जुड़े हैं। उनके पिता रामकपिल सिंह नरायनपुर के ज्येष्ठ उप प्रमुख रह चुके हैं।