विगत 10 दिनाें से पड़ रही हाड़कंपाती ठंड थमने का नाम ही नहीं ले रही है। शनिवार को कोहरा के कहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। सुबह चहुंओर कोहरे की चादर फैले होने से चलने वाले छोटे-बड़े वाहन रेंगते नजर आए। कोहरे के कारण चालक अपने वाहन की हेड लाइट जलाकर चल रहे थे। दोपहर में भगवान भास्कर ने कुछ देर के लिए दर्शन तो जरूर दिए, बावजूद इसके गलन-ठिठुरन बरकरार रही। वहीं घने कोहरे के कारण महत्वपूर्ण ट्रेनेें भी काफी विलंब से चल रही थीं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
कड़ाके की ठंड के कारण जहां लोगाें की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं उद्योग-धंधे बंद होने के कगार पर हैं। शनिवार को स्कूलों में अवकाश घोषित होने के बाद बच्चों को जहां राहत मिली, वहीं घने कोहरे व ठंड के चलते लोग घरों के अंदर रजाई-कंबल में दुबके रहे। पिछले 10 दिनों से लगातार सुबह-शाम कोहरे का कहर जारी है। आवश्यक कार्यवश घरों से बाहर निकलने वाले लोग शरीर को गर्म कपड़ाें से ढककर ही बाहर निकले।
शनिवार को नगर में स्थित दूकानाें पर रजाई भरवाने व कंबल की खरीदारी करने ग्राहकों का तांता लगा रहा। कड़ाके की पड़ रही ठंड के बाद भी नगर पालिका प्रशासन की तरफ से नगर क्षेत्र में कहीं भी अलाव जलवाने की व्यवस्था अभी तक नहीं करवाई गई है, जिससे आम राहगीरों को रात में ठिठुरना पड़ रहा है। शीतलहर चलते नगर के विभिन्न इलाकों में विचरण करने वाले छुट्टा पशु भी ठंड के कारण सुरक्षित ठिकाना तलाशते नजर आए। जगह-जगह लोग अपने स्तर से अलाव की व्यवस्था कर तापते रहे। घने कोहरे के कारण महत्वपूर्ण ट्रेनेें भी काफी विलंब से चल रही थीं, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। अपने ट्रेन के इंतजार में रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर यात्रीगण कंबल, मफलर, टोपी व दस्ताना पहनकर डटे रह्रे।