विंध्य क्षेत्र में तमाम सड़कें बदहाल हैं। उनमें कुछ पर तो इतने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं कि वहां सड़के के नामोनिशान भी नहीं बचे है। सड़क पक्की और अच्छी थी कि इसका पता उसके अवशेष से ही चल पाता है। लग लगातार इन सड़कों की बदहाली की शिकायत जनप्रतिनिधियों और नेताओं से करते रहे हैं लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब चुनाव में नेताओं को भी इन्हीं सड़कों पर हिचकोले खाते हुए वोटरों तक पहुंचना पड़ रहा है।
देश की सबसे बड़ी सड़क नेशनल हाईवे-7 मिर्जापुर नगर से गुजरती है। यह सड़क जिले को मध्य प्रदेश से जोड़ती है। इसकी हालत बदतर है। कई जगह पर तो सड़क के पक्की होने के निशान ही नहीं हैं। गांधी घाट से लेकर ड्रमंडगंज घाटी होते हुए मध्य प्रदेश की सीमा तक राजमार्ग जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। मिर्जापुर से नरायनपुर तक जाने वाली यह सड़क जनपद को वाराणसी, चंदौली एवं बिहार से जोड़ती है पर इस पर चलना कष्टदायक हो गया है। इसी तरह जिला मुख्यालय एवं विंध्यधाम को जोड़ने वाली सड़क मिर्जापुर-औराई मार्ग भी बदहाल है। इसको फोरलेन बनाया जा रहा है। सड़क खोद कर छोड़ दी गई है और काम बेहद धीमी गति से हो रहा है। इस पर दूसरे दिन ट्रकों के गुल्ले टूटते हैं और जाम लग जाता है।
दुद्धी-लुंबिनी मार्ग जो मिर्जापुर से होकर सोनभद्र को जाती है उस पर मुंहकुंचवां से लेकर बरकछा तक गड्ढे ही गड्ढे हैं। जनपद को जोड़ने वाली सभी प्रमुख मार्ग खस्ताहाल हैं, लेकिन नेताओं के लिए विधानसभा चुनाव में यह कोई मुद्दा नहीं है। लोग इन सड़कों की बदहाली की शिकायत विधायक से करते हैं तो वे केंद्र का मामला बता कर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। सांसद कहतीं हैं कि केंद्र ने बजट दे दिया है लेकिन निर्माण इकाई की हीलाहवाली के चलते सड़क नहीं बन पा रही है। जनता महीनों से सड़कों की हालत सुधारने के लिए गुहार लगाती रही लेकिन नेता एक-दूसरे पर बात को टालते रहे लेकिन अब चुनाव में उनको इन्हीं सड़कों पर हिचतकोले खाना पड़ रहा है तो चिंता सताने लगी है। वे सड़कों को दुरुस्त कराने का लोगों से वादा करते थक नहीं रहे हैं।