जमालपुर ब्लॉक के शेरवां, जाफरखानी व भुइली गांव के लोगाें को आज तक पीने योग्य शुद्ध पानी नसीब नहीं हो सका। स्वच्छ जल की चाह में ग्रामीण पांच साल तक इंतजार करते हैं कि चुने गए जनप्रतिनिधि ग्रामीणाें को शुद्ध जल मुहैया कराएंगे, लेकिन इंतजार करते-करते पांच साल तो क्या 70 साल गुजर गए, लेकिन ग्रामीणों को शुद्ध जल नसीब नहीं हो पाया।
ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता को सिर्फ कोरा आश्वासन देते रहे हैं। आज भी यहां के लोग खारा पानी पीने को मजबूर हैं। क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि यह इलाका कभी अहरौरा तो कभी चुनार विधानसभा तो वर्तमान में मड़िहान विधानसभा में दर्ज हो चुका है। जमालपुर ब्लॉक का शेरवां व भुइली इलाके के 29 गांव मड़िहान विधानसभा में वर्ष 2012 में ही मर्ज हो गए हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में यहां का नक्शा बदल दिया गया और चुनार तहसील का करीब आधा क्षेत्र जमालपुर ब्लॉक के शेरवां व भुइली व नरायनपुर ब्लॉक का आंशिक क्षेत्र मड़िहान विधानसभा क्षेत्र में मर्ज हो गया।
1980 में राजगढ़ के विधायक प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री स्व. पं. लोकपति त्रिपाठी ने शेरवां व भुइली में स्वच्छ जल मुहैया कराने के लिए पानी टंकी निर्माण की योजना बनाई थी, लेकिन वह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2012 में के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेशपति त्रिपाठी ने शेरवां व भुइली के ग्रामीणों से वादा किया था कि स्वच्छ पेयजल एवं विकास की पांच मूलभूत सुविधाआें को जो अधूरा छोड़ा गया है, उसे पूरा कराऊंगा लेकिन अभी तक नहीं करा पाए।
इस संबंध में विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने इसके लिए केंद्र व प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वर्ष 2013 में पानी टंकी निर्माण की योजना शेरवां व भुइली में बनाई गई थी लेकिन वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में केंद्र से कांग्रेस की सरकार चली गई और केंद्र व प्रदेश की सरकारों ने धन ही नहीं दिया।