मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार, संस्कृति विभाग, लखनऊ और केबीपीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को महाविद्यालय में इतिहास का पुनर्पाठ और भारत बोध विषय पर एक दिवसीय अभिलेख प्रदर्शनी और संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता अभय जी ने संगोष्ठी को रेखांकित करते हुए बताया कि इतिहास का पुनर्पाठ एवं भारत बोध जैसे मूल विचार आज अत्यंत मूल्यवान, प्रासंगिक और अनिवार्य हैं। यह इतिहास पुनर्पाठ या लेखन पर आधारित एक ऐसा केंद्रीय विचार है।
जिसमें देशज सांस्कृतिक, राजनैतिक, अर्थशास्त्रीय, ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय विमर्शों की रचना की जा सकती है। मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के कुल सचिव राम नारायण ने कहा कि अकादमिक ज्ञान-विमर्श में औपनिवेशिक मानस रचना के मूल में एक कथित इतिहास है, जो आधुनिक शिक्षा से प्रसारित मिथकों का व्याख्यान जान पड़ता है।
डॉ. देवेंद्रनाथ दुबे, अमिताभ तिवारी के साथ मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. महेंद्र कुमार, प्रोफेसर बालकेश्वर, डॉ. ऋषभ कुमार, अमित कुमार अग्निहोत्री, शिवकुमार यादव ने विचार व्यक्त किए।
प्राचार्य प्रोफेसर अशोक सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। संचालन डॉ. कुलदीप पांडेय ने किया। इस अवसर पर प्रो. राकेश कुमार शुक्ल, प्रो. अशोक कुमार सिंह चंदेल, प्रो. अर्चना पाण्डेय, प्रो. रमेश चंद्र ओझा, प्रो.मकरंद जायसवाल, प्रो.नम्रता मिश्रा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।