अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा शाखा नगर मिर्जापुर के नगर अध्यक्ष के आवास पर बुधवार को वीरांगना महारानी दुर्गावती का 452 वां बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर वीरांगना महारानी दुर्गावती के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत भूमि पर बहुत वीरांगनाएं हुई, जिसमें गोंडवाना की महारानी दुर्गावती का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिलाध्यक्ष रामप्यारे गोंड ने कहा कि गोंडवाना का साम्राज्य वर्षों पुराना है। उन्होंने महारानी के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्व में गोंडवाना के 52 गढ़ थे। आल्हा उदल के शौर्यगान की बखान करते इन गढ़ों में से एक महोबागढ़ के कालिंजर के चंदेल राजा कीर्तीराय थे, जिनकी पुत्री का नाम दुर्गावती था।
दुर्गावती निडर, वीर के साथ ही प्रजा हितैषी भी थीं, इनका विवाह गढ़ मंडला के गोंड राजा दलपत शाह के साथ हुआ। सभा को संबोधित करते हुए मिर्जापुर के नगर अध्यक्ष सुरेंद्र गोंड ने महारानी के कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती के ऐश्वर्य की गाथा जब अकबर को पता चला कि गढ़ा मंडला की शासक एक स्त्री है, तो उसके आंखों में खटकने लगा। वह कई बार गढ़ा मंडला पर आक्रमण किया, लेकिन महारानी के आगे उसकी एक न चली।
अकबर द्वारा बार-बार हमला करने पर रानी ने वीरता से जवाब दिया, जब उन्हें लगा कि वह बंदी बना ली जाएंगी तब महारानी ने अपनी कटार से अपने को बलिदान कर दिया। इस दौरान सुभाष गोंड, रामू गोंड, पवन गोंड, शुभम, बबलू यादव, मोनू गोंड, संतोष, चमन गोंड, चंपा देवी, लवकुश गोंड, आशीष गोंड आदि मौजूद रहे।